आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Atmatattvaviveka of Udayanacharya
आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा
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Wait, look at वैधम्य: does it have a repha?
Above म्य, there is NO repha! It is printed वैधम्य.
Wait, look at इनम: इ न म - no matra on म!
Line 20:
रहता । तथा द्रव्य, गुण और कर्मम स्वरूपात्मक, अन्योन्याभावात्मक
Wait, look at कर्मम: क र्म म - no matra on म!
Look at अन्योन्याभावात्मक:
Wait, look at line 20: स्वरूपात्मक, अन्योन्याभावात्मक
Is it अन्योन्याभावात्मक?
Wait, line 20 has:
रहता । तथा द्रव्य, गुण और कर्मम स्वरूपात्मक, अन्योन्याभावात्मक - wait, where does line 19 end and 20 begin?
Let's check the line breaks in the image:
Let's count lines from the divider:
अप्रतीति होना, एव अघटरूपम प्रतीति होना तथा घटकी अपेक्षा पटमें
वैशिष्ट्य ( धर्मान्तर ) का प्रतीति होना ये तीनों ही अनुभवसिद्ध हैं ।
अर्थात् उक्तप्रतीत