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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 261, कुल 530 में से

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पृष्ठ 261

२१२ आत्मतत्त्वविवेके
एव विशेषाभाव इत्यद्वैतम्, प्रपञ्चस्यापारमार्थिकत्वाच्च ।
निष्प्रतियोगिकमिति विधिरूपम् । अविचारितप्रपञ्चापेक्षया
तु शून्यमिति व्यवहारः ।
तथापि प्रपञ्चशून्यस्यानुभवमात्रस्य प्रपञ्चेन सह कः
सम्बन्धः ? न च नायं प्रकाशत इति चेत्, वस्तुगत्या न
कश्चित् । संवृत्या तु गगनगन्धर्वनगरयोराधाराधेयभाव इव
विषयविषयिभावः । स च यथा नैयायिकैः समर्थयिष्यते तथैव ।
वेद्यनिष्ठस्त्वसावस्मिन् दर्शन इति विशेषः । अविद्यैव हि
उसका अन्योन्याभाव नहीं है तथा वह अद्वैत ब्रह्मरूप है । जगत्प्रपञ्च
के अवास्तविक होनेके कारण ही उसका कोई प्रतियोगी नहीं है । इसी
लिये उसमे किसीका भेदरूप निषेध नहीं प्राप्त होनेसे वह अद्वैततत्त्व
निषेधात्मक न होकर विधिरूप है । "शून्यम्" यह व्यवहार तो सत्
या असतरूपसे अनिर्वचनीय घटपटादि प्रपञ्चकी दृष्टिसे है न कि
अद्वैतब्रह्मकी दृष्टिसे । अर्थात् अनुभवात्मक अद्वैततत्त्वके अतिरिक्त
कुछ नहीं है, यही शून्यताका अर्थ है ।
( प्रश्न ) फिर भी जब प्रपञ्च कोई वस्तु ही नहीं है, तो प्रपञ्चसे
शून्य केवल अनुभवमात्रका प्रपञ्चसे क्या सम्बन्ध है ? यह बताना
होगा । क्योंकि यह प्रपञ्च नहीं भासित होता है, ऐसी बात नहीं है ।
( समाधान ) ऐसे प्रश्नका यही उत्तर होगा कि प्रपञ्चके मिथ्यारूप
होनेके कारण उसके साथ अनुभवका वस्तुत कोई सम्बन्ध नहीं है ।
काल्पनिक दृष्टिसे तो जैसे गगन और गन्धर्वनगरका परस्पर आधाराधेय-
भाव सम्बन्ध होता है, वैसे ही प्रपञ्च और अनुभवका विषयिविषयभाव
सम्बन्ध है । विषयविषयिभाव क्या है ? यह तो जैसा नैयायिकोंने
माना है, वैसाही है । किन्तु वह सम्बन्ध न्यायमतमे विषय और ज्ञान
उभयनिष्ठ होता है, किन्तु इस ( वेदान्त ) दर्शनमें तो वह सम्बन्ध केवल
वेद्य ( विषय ) निष्ठा है और वेद्य प्रपञ्चके साथ ही निवृत्त हो जाता
है । यही विशेषता है । अविद्या ही जैसे जैसे परिणत होती रहती
है, जैसे जैसे घटपटादि विषयोंका अनुभाव्यरूपमें व्यवहार होता रहता