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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 530 में से

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पृष्ठ 21

( १० )
का निर्णय है । काशीस्थ गर्नमेन्टसंस्कृतकालेजमें न्यायशास्त्रके
प्रधानाध्यापक सर्वतन्त्रस्वतन्त्र मेरे गुरुदेव श्रीसूर्यनारायणशुक्लजीने भी
उद्योतकराचार्यका यही समय अपनी न्यायमञ्जरीभूमिकामे निर्धारित
किया है ।
वाचस्पतिमिश्र—
संस्कृतवाङ्मयमें अनेक वाचस्पति हुए हैं। उनमें दो दार्शनिक
वाचस्पति थे । उनमें एकको आचार्यमिश्र वाचस्पतिनामसे तथा
दूसरेको षड्दर्शनटीकाकृत् आचार्यवाचस्पतिमिश्रनामसे प्रसिद्धि प्राप्त
है । इनम द्वितीय षड्दर्शनारण्यानोपञ्चानन आचार्य वाचस्पतिमिश्र
ही न्यायविद्याकी महत्त्वपूर्ण परम्परामें ऋषिकल्प चतुर्थ महापुरुष
थे । इन्होंने •न्यायवार्तिकतात्पर्यटीकाके अतिरिक्त न्यायसूचीनिबन्ध
•न्यायकलिका या •न्यायकणिका-तत्त्वविन्दु-ब्रह्मतत्त्वसमीक्षा तत्त्ववैशारदी
और ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यपर भामतीटीकाकी रचना की थी। इसीलिये
‘षड्दर्शनटीकाकृत्’ इस सम्मानोपाधिसे ये