आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)
Atmabodha & Tattvabodha with Hindi Commentary
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: कैलाश आश्रम ऋषिकेश · कैलाश आश्रम ऋषिकेश (उद्गम)
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(पूर्वार्धं समाप्तम्)
(उत्तरार्धम्)
अथ चतुर्विंशतितत्त्वोत्पत्तिप्रकारं वक्ष्यामः ॥२७॥
अब २४ तत्त्वों की उत्पत्ति का प्रकार हम कहेगें ॥२७॥
ब्रह्मणस्तमोगुणप्रधानमायोपहितादाकाशः सम्भूतः आकाशा-
द्वायुर्वायोस्तेजस्तेजस आपोऽद्भ्यः पृथिवी॥२८॥
तम प्रधान माया से उपहित ब्रह्म से आकाश उत्पन्न हुआ
आकाशभावापन्न ब्रह्म से वायु की उत्पत्ति हुई। इसी प्रकार
वायुभावापन्न ब्रह्म से अग्नि, अग्निभावापन्न ब्रह्म से जल और
जलभावापन्न ब्रह्म से पृथ्वी की उत्पत्ति हुई। इस प्रकार सारे
भूत-भौतिक पदार्थों की उत्पत्ति ब्रह्म से सिद्ध होती है ॥२८॥
तेषां पञ्चतत्त्वानां मध्य आकाशस्य सात्त्विकांशाच्छ्रोत्रेन्द्रियं
सम्भूतम्। वायोः सात्त्विकांशात् त्वगिन्द्रियं सम्भूतम्। अग्नेः
सात्त्विकांशाच्चक्षुरिन्द्रियं सम्भूतम्। जलस्य सात्त्विकांशा-
द्रसनेन्द्रियं सम्भूतम्। पृथिव्याः सात्त्विकांशात् घ्राणेन्द्रियं
सम्भूतम्। एतेषां पञ्चतत्त्वानां समष्टिसात्त्विकांशादन्तःकरणं
सम्भूतम्, तच्च वृत्तिभेदान्मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानीति
चतुर्धा॥२६॥
इन पाँच तत्त्वों में से आकाश के सात्त्विक अंश से
श्रोत्रेन्द्रिय उत्पन्न हुई। वायु के सात्त्विक अंश से त्वगिन्द्रिय उत्पन्न
हुई। अग्नि के सात्त्विक अंश से चक्षुरिन्द्रिय उत्पन्न हुई। जल के
सात्त्विक अंश से रसनेन्द्रिय उत्पन्न हुई। पृथ्वी के सात्त्विक अंश से