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सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 75, कुल 80 में से

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पृष्ठ 75

िथिषे तिथौ'?
Let's check Anekarthasangraha (अनेकार्थ० ३.६२५):
In Hemachandra's Anekarthasangraha 3.625:
"प्रतिपद् विशिखा-तिथ्योः"?
No, in Anekarthasangraha, words with 3 syllables ending in d:
"प्रतिपत् तिथिविद्..."
Let's read what's printed:
'प्रतिपत्तित्थिये तिथौ' or 'प्रतिपत्तित्थिषे'?
Looks like: 'प्रतिपत्तित्थिये तिथौ' (अनेकार्थ० ३.६२५)।

Line 26: "३.६२५)। पालि-पटिपदा (प्रतिपद्, प्रतिपदा)।"

Line 27: "• ध्रुवाये = निश्चित रूप से । सं.-ध्रुवम् । (ध्रुवति स्थिरीभवतीति ।"
Line 28: "निर्दिष्टनम्।) । पालि-धुवं (ध्रुवम्)।"
Wait, "निर्दिष्टनम्"? Or "निश्चेष्टनम्"?
न, ि, र, ्, द, ि, ष, ्, ट, न, म, ् -> "निर्दिष्टनम्" or "निर्दिष्टम्"? Looks like "निर्दिष्टनम्" or "निश्चेष्टनम्".

Line 29: "• अनुपोसथं = उपवास के दिना