सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

पृष्ठ 37, कुल 80 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 37

यहाँ प्रस्तुत पृष्ठों का पूर्ण एवं शुद्ध लिप्यंतरण दिया गया है:


[पृष्ठ ५६]

५६ / सम्राट अशोक के अभिलेख

[स्तंभ-लेख ६ (अवशेष)]
४. हेमेवा सवानिकायेसु पटिवेखामि
५. सवपासंडा पि मे पूजिता विविथाय पूजाय।
६. ए चु इयं अतना पचूपगमने से मे मोख्यमते
७. सडुवीसतिवसअभिसितेन मे इयं धंमलिपि लिखापिता


स्तंभ देहली-टोपरा : सप्तम अभिलेख

१. देवानांपिये पियदसि लाजा हेवं आहा
२. ये अतिक्कतं अंतरं लाजाने हुसु हेव इच्छिसु कथं जने धंमवडिया वढेया
नो चु जुने अनुवुपया धंमवडिया वढिथा
३. एतं देवानांपिये पियदसि लाजा हेवं आहा
४. एस मे हुथा
५. अतिक्कतं च अंतरं हेव इच्छिसु लाजाने कथं जने अनुपथाया धंमवडिया
वढेया ति नो च