अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)
Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary
महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा
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माला, IO मूलं .—(93) L सुरते स्पृहा.
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V.
(1) L, V °रम्या.—(2) M °देश प्रभवा.—(3) V, B °रत° M °रति °
—(4) M परिरम्भलालसाः.—(5) M ° चुम्बतिकार्य.—(6) V रद-
च्छद °. —(7) M मृदूपचारा च रता विहंसी .—(8) L
मर्दनेन, M नर्मवर्षा, IO मर्मदंशा .—(9) L स्यादान्ध्र-
देशप्रभवा .—(10) M ° कण्डूजतयुत °.—(11) M चन्द्रध्वजभूतला-
चिरं .—(12) M रतिप्रसङ्गे .—(13) V कोशलदेश °.—(14) M महा-
राष्ट्रभवास्तन्ततं .—(15) M, B नानादेश °.—(16) M ° धृतशंसा;
B ° भृत °.—(17) M सुरक्ता .—(18) M विरलनेत्रा .—(19) L गौड-
जा वङ्गजा च.—(20) M नखरासतोषिणी.—(21) M मदवर्धा कलि-
तेयमु °; B, IO कथितेयमु °; B ° मुद्रलो, IO ° मुन्कुला.—(22)
M स्मरके लिसंगरे .—(23) B °विगोपने; M IO °निगोपने.—
(24) IO दृढसंभोग °; B ° संभोगरत °.—(25) B कथितेयं .—
(26) L सुकोपनाश्चल °; B ° दृष्टिपाताः.—(27) B खलु.—
(28) B ° भवाः पुरंध्रयः.—V, IO transpose stanzas 12 and 13.—
(29) M °पद्मवदनाः.—(30) B ° परिपीडन°.—(31) L, M, B ° रतिः
—(32) M तैरर्मुक्तिः—(33) M, IO ° पुरे.—(34) M ° प्रसूतास्त्रिलिङ्ग-
जा स्युः किल कामिनीस्ताः; B स्युरंगनाश्चेति तिलंग °, IO
स्युरंगना नागतिलंग .—(35) L प्रसाहसा, B ससाध्वसा .—(36)
B द्रविड; L प्रसूताः .—(37) V ° देशे stanza 36 is wanting in
the Madras Mannscripts.—(38) L नखप्रदानादि °.—(39) L
° रोषाः, M ° जातिवेषः; B, IO ° दोषाः.—(40) L दौष्ट्यभृतः
(41) L कांबोजगौड °.—(42) M ° प्रभवाश्च नार्यः .—(43) B सं-