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सर्वकोश
अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)

Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary

महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished112 पृष्ठ

पृष्ठ 84, कुल 112 में से

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पृष्ठ 84

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मन्त्रभावितः .—(51) M, IO प्रधान .—(52) L प्रवासनमथ रोगो
वार्द्धकं चापि पत्युः .—(53) M वसतिरपि च, B, IO वसतिरथ
च.—(54) M क्षितिरपि निजदत्ते .—(55) L ° समयक्षतादि .—
(56) M भर्तॄणामनुवादिभिश्च.—(57) L, M प्रयाति .—(58)—L संप्र-
तीच्छति, B सा प्रयच्छति .—(59) B चापि सीदति .—(60)—B
सम्यगाभ्या °.—(61) M स्मृता .—(62) B अभ्यासजा सा दुः
साध्या .—(63) V, B सा .—(64) M सान्द्राणि स्वर्ग्यभूत्वा च .--
(65) L reads:
| नैसर्गिकी स्वभावोत्थापूर्वजन्ममसमुद्भवो । |
| दम्पत्योरुत्तमा प्रीतिर्वज्रलेखेव राजते ॥ |
(66) IO प्रोक्ता .—(67) This stanza is wanting in M.—(68) B
षड्विधः .—(69) V प्रोक्तः .—(70) M, IO, R कामवेगस्तथाष्टधा .—
(71) M ° संनिभा corrected into ° कोमला .—(72) V . गोजिह्वा-
भा खर °, M गोजिह्वाथस्समस्पर्शः, IO, R गोजिह्वावत्खरस्पर्शे-
त्युक्तं भेदचतुष्टयं .—(73) L ° पूर्वतरास्ताश्च, M ° पूर्वगुणं त्तत्तु
श्रेष्ठं ज्ञेयं .—(74) M स्थिता नाट्ये .—(75) L ° समाकृतिः, B, IO
हि सा; M ° समीहता .—(76) L स्यन्दते सम्भो .—(77) L स्यन्दते
यत्तु कामाम्भः .—(78) B ° मध्याद् °.—(79) L निरन्त-
रम् .—(80) M मन्मधाकृतामित्या °, L ° मित्याहुः कामशास्त्रविशा-
रदाः .—(81) V योनिमध्ये; L ° रन्ध्रान्नातिदूरे .—(82) L, V
तद्विसर्गे .—(83) L, V. मार्गादि °.—(84) M नाल्पज्वरयुतसुतनु-
स्त्यक्तमाना प्रसन्ना; L नव्या ज्वरकृततनुता .—(85) IO वरांगी .—
(86) L पुंसां .—(87) M कुचयुगे .—(88) M प्रियं प्रियतमा .—(89) M
दीयते .—(90) B, IO प्रत्यक्तं .—(91) M ऽथ कुरुते .—(92) B