अनङ्गरङ्ग (महाकवि कल्याणमल्ल - कामशास्त्र एवं रति-प्रयोग संस्कृत मूल पाठ)
Ananga Ranga of Kalyanamalla with Commentary
महाकवि कल्याणमल्ल (सम्पादक: पं. शालिग्राम वैश्य) द्वारा
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M मानिभिः .—(7) B ° जीवति °, M जीवन °.—(8) L प्रिय भू-
षणैः .—(9) L रज्यति .--(10) L, M, IO, R स्वालाप°; M °गौ-
रवः.--(11) V भामिनी .—(12) V, B ° वर्णातिखर्वा .--(13) V M
°योग्या, B °योगा .--(14) M गूढकच्छा, IO प्रौढकचा .—
(15) V कफप्रकृतिका श्रेष्ठा, IO, कफप्रकृतिरुत्तमा, R श्रेष्ठ-
बला कफप्रकृतिः, B बलाश, ° as have also P. 204, 238; L वला-
स°.—(16) IO मध्यमा पित्तला .---(17) M, B, IO °भिदध्महे .—
(18) V °पादयुग्मा .--(19) M सुरतेतिदक्षा, IO च दृढा°.—(20)
M शान्तमृदु°.—(21) L च .—(22) B क्षणतृप्ता, M क्षण त्या
[!], IO क्षणप्रसन्नकुपिता, P 138 क्षणतृप्तप्रसन्ना, V क्षणं रुष्टा
—(23) L प्रौढ °.—(24) L सोष्माश्लथ °.—(25) B चं .—(26) L
प्रलापिका; B °केशकलापिनी; IO °प्रलापिता .—(27) M रुद्ध-
पङ्कजलोचना .—(28) L सन्तोषयुक्ताखिल कर्मदक्षा .—(29) M नि-
र्मलकान्तिवेषा .—(30) L रोगान्विता, M रोमान्विता .—(31) L
श्रतीवसख्यादिषु, M °संख्यादिषु बद्धवाञ्छा सुरागिणी .---(32) M
नानारतैरेति .—(33) M प्रहासं .—(34) L हृष्टा सुवासाः .—(35) M
सर्वातिकष्टा .—(36) L भवेदियं स्त्री तु .—(37) M, B, IO सो-
च्छ्वासं बहु जृम्भते .—(38) M निद्रासक्तिश्च .—(39) L उद्योगं, M
सफलं .—(40) L नेत्रं; M सम्भ्रमयन्मुहुः .—(41) L बुभुक्षापीडि-
ता नित्यं; B अतिक्रुधार्ता, IO अप्रतीता च .—(42) L काकस-
त्त्वा प्रकीर्तिता .—(43) V अत्यन्तं .—(44) L °संयुक्ता, M °सं-
सक्ता, B, IO °रक्ता च .—(45)—IO, R सोच्यते .—(46) M, IO
० दुष्ट .—(47) IO, R विषयानेव वाहते .—(48) L गानादौ; B
स्नानाद्यैः .—(49) L, IO, R °सत्त्वा तु सा .—(50) M नारीणां