अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइनमें शचीन्द्रनाथ सन्याल भी थे। बाद में इन लोगों ने नई समिति
बनाई। एक मुखबिर के बयान के अनुसार शचीन्द्रनाथ कलकत्ता
जाते-आते रहते थे। वहाँ से वे बम और धन प्राप्त करते थे। 1913 की
शरद ऋतु में शचीन्द्र नाथ के साथियों ने बनारस के स्कूल कालेजों में
राजद्रोहात्मक पर्चे बाँटे और डाक द्वारा दूसरी जगह भी भेजे। लोग गाँवों
में जाते थे, भाषण देते थे। भाषण के दो विषय होते थे। एक तो यह कि
अंग्रेजों को बाहर करो दूसरा यह कि अपनी हालत सुधारो। यह बात
खुल्लम-खुल्ला कही जाती थी।
वर्ष 1914 में रास बिहारी जो दिल्ली और पंजाब के षड्यंत्रों में
मशहूर हो गये थे बनारस आये और सारा नेतृत्व अपने अधिकार में ले
लिया। शचीन्द्र दल के सदस्य समय-समय पर उनसे मिलते थे। 1914 के
नवम्बर की रात जब वे एक बम की टोपी की जाँच कर रहे थे तो वह
फट गई, इससे शचीन्द्र नाथ और रास बिहारी को चोट आ गयी।¹ इसके
बाद विष्णु गणेश पिंगले से मुलाकात हुई। पिंगले ने बताया कि 4000
आदमी विद्रोह की गरज से अमेरिका से आ चुके हैं और 2000 और आने
वाले हैं। 1915 में पिंगले और शचीन्द्रनाथ सन्याल मिले और रास बिहारी
के साथ महत्वपूर्ण सभा की। इसमें उन्होंने बतलाया कि शीघ्र ही एक
विराट विद्रोह होने वाला है और वे देश के लिए मरने को तैयार रहें। बाद
में शचीन्द्र नाथ पकड़े गये। अधिकारियों को पता चल चुका था कि
बनारस को केन्द्र मानकर संयुक्त प्रान्त, मध्य प्रदेश, पंजाब में क्रांतिकारी
गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं, तीनों प्रान्तों की पुलिस सजग कर दी
गई।² भारत रक्षा कानून के मुताबिक बनायी गयी एक अदालत में
मुकदमा चला।
- भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्यथनाथ गुप्त पृष्ठ 85
- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, राम गोपाल, पृष्ठ-208
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