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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 297 में से

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राजनैतिक स्वतंत्रता हो या नैतिक मूल्य या भारतीय संस्कृति।¹ इसी
कारण क्रांतिकारियों का मुख्य उद्देश्य भारत भूमि को अंग्रेजी शासन से
मुक्त कराना था।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश का क्रांतिकारी आन्दोलन मुख्यतः बंगाल से
फैला। सर्वप्रथम इस प्रान्त में, जो शान्तिपूर्ण प्रान्त कहा जाता था,
नवम्बर 1907 के ‘स्वराज्य’ नाम से इलाहाबाद से प्रकाशित पत्र के माध्यम
से क्रांतिकारी प्रचार प्रारम्भ हुआ। संयुक्त प्रान्त (उ०प्र०) में 1908 में
शचीन्द्र नाथ सन्याल ने एक क्लब की स्थापना की। इसी क्लब के
माध्यम से क्रांतिकारी गतिविधियों का प्रारम्भ हुआ। इस क्लब का नाम
अनुशीलन समिति रखा गया। दिखावे के लिए ऊपरी तौर पर समिति का
उद्देश्य मानसिक, नैतिक, शारीरिक उन्नति करना था।² यह समिति 1914
तक लगभग निष्किय रही। जब रास बिहारी बोस 1914 में बनारस पहुँचे
तब उन्होंने संयुक्त प्रान्त में क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन अपने
हाथ में ले लिया। हाँलाकि पुलिस को उनकी तलाश थी और इनाम की
भी घोषणा हो गयी थी। पुलिस को चकमा देकर सन् 1914 के अधिकांश
समय में वे बनारस रहे। उनके नेतृत्व में अनुशीलन समिति काफी सक्रिय
हो गयी। बम तैयार किये गये और बंगाल से भी काफी मात्रा में बम
प्राप्त किये गये।³ ‘अनुशीलन समिति’ संस्था खोलने का मुख्य उद्देश्य
राजद्रोह प्रचार करना था। यह समिति 1909 से 1913 तक कायम रही।
इस समिति से वे सदस्य अलग हो गये जो समिति की कार्य प्रणाली से
असहमत थे, वे नहीं चाहते थे कि अंग्रेजों से इस प्रकार मुकाबला किया
जाय। गरमदल के सदस्य भी बाद में अलग हो गये,

  1. आधुनिक भारत का इतिहास, बी०एल०ग्रोवर, पृष्ठ -310
  2. भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्मथनाथ गुप्त पृष्ठ-83
  3. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, रामगोपाल पृष्ठ -207
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