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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 70, कुल 297 में से

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यह डाकू संगठन ग्वालियर राज्य में डाका डालने से संबंधित कार्य
में ही उलझ गया और एक दिन ऐसी ही योजना में पुलिस से मुठभेड़ हो
गयी और दल के पैंतीस सदस्य मारे गये। गेंदालाल दीक्षित बन्दी बनाकर
पकड़ लिए गये। दीक्षित जी को ग्वालियर किलें में भेज दिया। अब पं०
गेंदालाल दीक्षित को मुक्त कराने के लिए 'मातृवेदी' के सदस्य राम प्रसाद
बिस्मिल, मुकुन्दी लाल, शिवकृष्ण आदि सदस्यों ने योजना बनायी।
लेकिन अपने ही साथियों की अल्पज्ञता के कारण भेद खुल गया और
क्रांतिकारियों की धर-पकड़ शुरू हो गयी। राम प्रसाद बिस्मिल तो फरार
हो गये थे। मैनपुरी षडयंत्र के नाम से पकड़े गये सदस्यों पर मुकदमा
चला।¹
यह वही समय था जब अशफाक उल्ला खाँ शाहजहाँपुर के मिशन
स्कूल में सातवीं कक्षा के छात्र थे। षड्यंत्र के सिलसिले में गिरफ्तारियाँ
करने पुलिस मिशन स्कूल में भी जा पहुँची। सरकारी गवाह की पहचान
पर उनके स्कूल का एक छात्र राजाराम भारती भी बन्दी बनाया गया।
राजाराम उस समय दसवीं कक्षा का छात्र था। संदेह के आधार पर
दो-तीन विद्यार्थी और हिरासत में लिये गये। जिस दिन मिशन स्कूल में
षड्यंत्र के विषय में पुलिस पहुँची, वहाँ भय का वातावरण व्याप्त हो गया।
अशफाक ने इसका उल्लेख किया है-'मैं मिशन स्कूल का एक छोटे दर्जे
का तालिबे इल्म था, जबकि मैनपुरी साजिश का मुकदमा चला, हमारे
स्कूल में भी इस केस का अप्रूवर शिनाख्त की गरज से लाया गया था
और उसने दसवें दर्जे से राजाराम भारती को गिरफ्तार कराया और उस
समय वह भी हिरासत में ले लिए गये। गरज यह कि वह दिन भी अजीब
दिन था, पुलिस की लाल पगड़ियाँ स्कूल के चारों ओर दिखाई पड़ती
थीं।

  1. राम प्रसाद 'बिस्मिल' रचनावली, दिनेश शर्मा, पृष्ठ-160
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