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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 71, कुल 297 में से

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पृष्ठ 71

यह एक नयी बात थी कि स्कूल का तालिबेइल्म इस सूरत में
गिरफ्तार हुआ है। क्योंकि बंगाल में यह मामूली बात और आये दिन का
मामला है। मगर यू०पी० में यह बात कहाँ थी? गरज की अजीब दहशत
व खौफ स्कूल पर छाया हुआ था और हर एक लड़का अपनी जान की
खैर मनाता था। मैं उस रोज स्कूल जरा देर से गया था। कोई लड़का
अन्दर से बाहर नहीं निकल सकता था और हर दर्जे में शिनाख्त हो रही
थी। मैं भी अपने दर्जे में खामोशी से जा बैठा, मगर नफ्से मामला
मालूम करने के लिए बेचैन था, जो मेरे नेचर में था। चूंकि मैं स्कूल का
एक हाकी खेलने वाला आजाद खयाल तालिबेइल्म था, मास्टर साहब से
पूछने को झुका, मगर मास्टर साहब बताने से डरे कि एक लड़के ने कहा
राजाराम ने कहीं डाका मारा है और वह गिरफ्तार किये गये है। साथ ही
और भी लड़के गिरफ्तार हुए हैं।¹ सबसे अलग-थलग रहने वाले विद्यार्थी थे
राजाराम। अशफाक उल्ला को सहसा विश्वास ही नही हुआ था कि
राजाराम जैसे एकान्त प्रिय शान्त प्रकृति के व्यक्ति जो छात्र हैं क्रांतिकारी
भी हो सकते हैं। अशफाक ने तो पहले यही सोचा कि राजाराम ने कहीं
डाका डाला होगा। जब उनके एक साथी ने बताया कि राजाराम किसी
खुफिया सोसायटी का मेम्बर है न तो राजाराम कातिल है न डाकू। यह
सुनकर अशफाक को आश्चर्य हुआ। अशफाक ने उस मित्र में भी
क्रांतिकारी होने के गुण देखे। जब उस मित्र ने निर्भीकता से कहा कि मैं
भी देश के लिए मरने को तैयार हूँ अशफाक बहुत प्रभावित हुए। अशफाक
पर हुए प्रभाव का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि वे इसी
समय राम प्रसाद बिस्मिल से मिलने को बेताब हो गये। बिस्मिल
शाहजहाँपुर के ही थे और वे इस समय फरार थे।


  1. अशफाक उल्ला खाँ, भवानी सिंह राणा, पृष्ठ-33

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