अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयह देखकर अशफाक का उत्साह बढ़ गया और भीतर हलचलें तेज हो गई
थी। अंग्रेजी स्कूल के कारण अशफाक का मन पढ़ाई में नहीं लगता था।
वे नौवीं कक्षा से आगे नही पढ़ सके। उनका मन तो कहीं और लग
गया था। अध्ययन से अरुचि होने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन
इसमें उनके एक मित्र का विशेष हाथ रहा है। अशफाक ने मित्र का नाम
लिए बगैर लिखा भी है। अशफाक के स्कूल के दिनों में उनके बहुत सारे
साथी हो गये थे। वे मनोहर लाल ज्योतिषी के बेंत से डरते थे और बचते
रहते थे। इसके लिए वे फूँक-फूँक कर कदम रखते थे। फाँसी घर से लिखे
गये वक्तव्य में वे एक दोस्त का जिक्र करते है कि, 'मुझे एक दोस्त से
शिकवा है, जिसे मैं दिलोजान से चाहता हूँ।'¹ अशफाक दोस्त की दोस्ती
के इतने कायल थे कि दुनिया की खबर ही नही रही, उसे वह अपना
दीनोईमान मानते थे। अपना सब कुछ समझते थे। वे बाद में इतने दुखी
हुए कि तालीम हासिल करने में रुकावट का सबसे बड़ा कारण अशफाक
ने दोस्त को मान लिया।
अशफाक उल्ला खाँ को बचपन में कसरत का बड़ा शौक था। यही
कारण था कि वे अच्छी खासी देह के मालिक थे। उन्हें तैरने का भी बड़ा
शौक था। लेकिन जब वे बड़े हुए तो अच्छे खिलाड़ी होते हुए भी उनका
शौक धीरे-धीरे छूटता गया। सदैव देश के विषय में या मैनपुरी काण्ड के
विषय में सोचा करते थे।² मैनपुरी षडयंत्र के मुकदमें ने तो उनकी
मानसिक स्थिति ही बदल दी। अब अशफाक मन-मस्तिष्क से परिपक्व हो
चुके थे।
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-22
- शहीद अशफाक उल्ला, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ-8
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