अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआठ पास कर आये तो उन्होंने अपने पाठ्यक्रम की किताबों में सर वाल्टर
स्कॉट की लिखी हुई नज्म 'लव ऑफ कन्ट्री' पढ़ी। होरेशस का किस्सा
भी पढ़ा। जिसमें उसने कहा था कि देश पर शत्रु के आक्रमण के समय
यदि पुल तोड़ दिया जाय तो टाईबर नदी को पार कर फौज नही आ
सकती... मैं जाता हूँ और इस तंग रास्ते में मैं तीन साथियों सहित खड़े
होकर लड़ूँगा और इधर पुल तोड़कर नदी में डाल दिया जायेगा। वैसा ही
हुआ और रोम बच गया। आज भी बच्चे वीर होरेशस की कहानियाँ
पढ़कर देशभक्ति हेतु प्रेरणा पाते हैं। देश भक्ति की यह कहानी और
वाल्टर स्कॉट की नज्म अशफाक के अध्यापक ने कुछ इस तरह सुनायी
कि अशफाक अपने को रोक न सके और खूब रोये।¹
यह सत्य है कि किसी भी व्यकित के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर उसकी
शिक्षा, उसका अध्ययन और उसका परिवेश, सामाजिक वातावरण खासा
प्रभाव डालता है। निर्माण जब व्यक्तित्व का होता है तो ये उक्त चीजे
अपना असर जरूर दिखाती हैं और अपने इर्द-गिर्द तमाम आरोहों-अवरोहो
के बीच मनुष्य का निर्माण होता रहता है। अशफाक की भूमि भी इसी
परिवेश और समाज से निर्मित हुई है। उनके सामने बहुमत, अल्पमत,
जय, पराजय, अमीरी गरीबी के ऐसे चिह्न बन गये कि उनकी दशा ही
बदल गयी और वे आगे की शिक्षा ग्रहण नही कर सके। अशफाक शिक्षा
को खूब महत्व देते थे। इसके बावजूद वे तामील (अच्छी तामील) की वह
ऊँचाई नहीं छू सके जिसका स्वप्न वे कभी देखते थे। निश्चित ही एक
सुलझा और कुशाग्र बुद्धि का नागरिक देश से बहुत पहले विदा हो गया।
हो सकता था कि यदि वे
- शहीद अशफाक उल्ला, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ 9
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