अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउनके कथन में व्यंग्य की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। वे सदैव दुख
व्यक्त करते रहे कि पठान खानदान शिक्षा के क्षेत्र में विरक्ति का भाव
क्यों बनाये रखा। शिक्षा प्राप्त करने की बात कौन कहे, वे अपने बच्चों
को उत्साहित करने के बजाय हतोत्साहित किया करते थे। सारी सुविधाएं
होते हुए भी शिक्षा का अभाव अशफाक को खलता रहा।
अशफाक उल्ला खाँ के पिता मुहम्मद शफीक उल्ला खाँ थे। शफीक
उल्ला का मकान शाहजहाँपुर के जलाल नगर मुहल्ले में था। वे पुलिस
विभाग में एक जिम्मेदार पद (सब इंस्पेक्टर) पर कार्यरत थे। यह कोई
मामूली बात नहीं थी। जबकि जनता लाल पगड़ी देखकर भागती थी, उस
काल में अशफाक के पिता पुलिस के अच्छे पद सब-इन्स्पेक्टर पद पर हों,
परिवार का वैसे ही मान सम्मान जनता में बढ़ गया था। लेकिन
अशफाक उल्ला खाँ के जन्म के पूर्व ही वे अपने पद से मुक्त हो गये
थे। यही नहीं अभी अशफाक बचपन के प्यार से सराबोर ही थे कि
शफीक उल्ला खाँ का देहावसान हो गया। एक ऐसे पिता का चला जाना
जो अंग्रेजी सरकार को अपनी गहरी दृष्टि से देखे थे, एक-एक बारीकियां,
अंग्रेजी संवेदना और व्यवहार जानते थे, अशफाक के हित में कतई अच्छा
नहीं हुआ। बावजूद इसके अशफाक अपने बाल्यकाल में अपने पिता से
पुलिस की नौकरी और अंग्रेजी हुकूमत के विषय में पूछते रहते थे, सो
उन्हें खासा अनुभव प्राप्त हो गया था। अशफाक की अवधारणा अच्छी
नहीं बन पड़ी थी। बाद में चलकर अशफाक ने इस संबंध में लिखा है -
'मेरे वालिद साहब शफीक उल्ला खाँ सब-इन्स्पेक्टर पुलिस थे, मगर खुदा
के फजलोकरम से मेरे पैदा होने से पेश्तर ही वह मुस्तेदी पदमुक्त हो चुके
थे और जोकि वह मेरी कम उम्र में ही दुनिया से गुजर गये। खुदा उनको
जिबाहेरहमत दे और उनके कारनामों को, जो अय्यामे मुलाजमत में किये
थे,
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