अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअशफाक उल्ला खाँ अपने नाम के आगे वारसी लगाते थे और
'हसरत' उपनाम से कविताएँ लिखा करते थे। उनकी काव्य रचना पर एक
दृष्टि देने पर ज्ञात होता है कि वे उच्च कोटि के शायर थे, शायरी पर
उनका अधिकार था। उन्होंने अच्छी गज़लें कहीं हैं, वही कत्आत, नज़्मों
में भी कम नहीं दिखते। कविता में उनकी आंतरिक वेदना, संवेदना,
भावना का पता चलता है। कुछ रचनाएँ तो दार्शनिक भाव से कही गयी
है तो कुछ आत्मलाप की मुद्रा में। उनकी रचनाओं से स्पष्ट है कि वे
सिर्फ क्रांतिकारी ही नही थे, भावुक हृदय कवि भी थे। कहीं वे सरकारी
वकील पर व्यंग्य करते हैं तो कही बसंत के आगमन की मस्ती। इस्लाम
में उनका विश्वास था लेकिन वे सभी धर्मों का आदर करते थे। यह
उनके व्यक्तित्व की खास पहचान थी। कुल मिलाकर सम्पूर्ण व्यक्तित्व
रेखांकित करने योग्य, प्रेरणा के योग्य और युवाओं के आदर्श।
अशफाक की कुछ अन्य कविताएं भी (गज़लें) रेखांकित करना
आवश्यक है, जो उनके व्यक्तित्व को (काव्य प्रतिभा) निखारता है :-
‘‘पहिनाने वाले अगर बेड़िया पहनाएँगे।
खुशी से कैद के गोशे को हम बसाएँगे।।
जो सन्तरी वीर जिन्दा के सो भी जाएँगे।
वह राग गा के उन्हें नींद से जगाएँगे।
तलब फजूल है काँटे को फूल के बदले।
न ले बहिश्त भी हस होमरूल के बदले।।
सन्तरी देख कर इस जोश को शरमाएँगे।
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