अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 220, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंराग जंजीर की झन्कार में हम गायेंगे।।¹
‘ ‘सितमगर अब यह आलम है तेरे बीमारे फुरकत का।
लबों पर दम है दिल में बलबला शौके शहादत का।।
मेरी दीवानगी पर चारागर हैरां न हो इतना।
यही अंन्जाम होना चाहिए नाकाम उलफत का।।
बुताने संग दिल सुनते नहीं फरियाद बेकस की।
निराला ढंग है उन खुदपरस्तों की हुकूमत का।।
मिटाकर जानो दिल अपना किसी जालिम जफाजू पर।
तमाशा अपनी आँखों देखता हूँ अपनी किस्मत का।।
हविस हूरों की हो जिसमें दिलाये याद गिल्मां को।
जनाबे शेख़ मैं कायल नहीं ऐसी रियाज़त का।।
बर आएँ हसरतें हासिल स्कूने कल्ब मुज़तर हो।
कहाँ ऐसा मुकद्दर हाय मुझ बरमश्ता किस्मत का।।
मज़ा जब है कि वह कह उठें ‘अशफाक’ उनका क्या कहना।
गज़ल है या मुरक्का है तेरे वक्ते मुसीबत का।।’’²
अशफाक की काव्य रचनाएँ आजादी के उद्गार हैं। यही नही वे देश
प्रेमी होने का दावा भी करते हैं। अपनी मिट्टी से प्यार की बुलन्दी छूने
वाले अशफाक ऐसे वियोगी जान पड़ते है जिसमें उनका देश प्रेम छूट रहा
है या यूँ कह ले कि वे कुछ और करना चाहते थे। अशफाक की कविताएँ
सदैव प्रेरणा देती रहेंगी और इतिहास की थाती साबित होगी।
- रामप्रसाद बिस्मिल, रचनावली, सम्पादक-दिनेश शर्मा, पृष्ठ -188
- राम प्रसाद बिस्मिल रचनावली, सम्पादक-दिनेश शर्मा, पृष्ठ -188
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