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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 218, कुल 297 में से

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पृष्ठ 218

• अपना यह अहद सदा से था कि मर जायेंगे,
नाम माता तेरे उश्शाक में कर जायेंगे।¹
• कौन वाकिफ था कि यूँ सर पे बला आएगी,
बैठे बिठलाए हुकूमत यह गज़ब ढायेगी।
• फना है सबके के लिए हम पे कुछ नहीं मौकूफ,
बका है एक फकत जाते किब्रिया के लिए।
• तनहाई गुरबत से मायूस न हो 'हसरत',
कब तक न खबर लेंगे याराने-वतन तेरी।²
(12) अशफाक की एक हिन्दी कविता
• हे मातृभूमि तेरी सेवा किया करूँगा।
फाँसी मिले मुझे या हो जन्म कैद मेरी,
बेड़ी बजा-बजाकर तेरा भजन करूँगा।³
(13) अकीदत के फूल
• जुबाने हाल से अशफाक की तुरबत ये कहती है।
मुहब्बाने वतन ने क्यों हमें दिल से भुलाया है।।
बहुत अफसोस होता है बहुत तकलीफ होती है।
शहीद अशफाक की तुरबत है और धूमों का साया है।।⁴

  1. अशफाक उल्ला और उनका युग, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ -90
  2. अशफाक उल्ला और उनका युग, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ 90
  3. अशफाक उल्ला और उनका युग, सुधीर विद्यार्थी, पृष्ठ 91
  4. काकोरी शहीद स्मृति - सम्पादक- भगवानदास माहौर, पृष्ठ -231
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