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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 167, कुल 297 में से

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पृष्ठ 167

• दस वर्ष का कारावास- योगेश चन्द्र चटर्जी, मुकुन्दी लाल, गोविन्द
चरमकर, राम कुमार सिन्हा, रामकृष्ण खत्री
• सात वर्ष का कारवास- विष्णु शरण दुब्लिस, सुरेश भट्टाचार्य
• चार वर्ष का कारवास - प्रणवेश चटर्जी
• पांच वर्ष का कारवास- भूपेन्द्र नाथ सन्याल, प्रेमकृष्ण खन्ना, राम
दुलारे द्विवेदी¹
काकोरी काण्ड के अभियुक्तों की सुनवाई रिंग थियेटर में होती थी।
सरकारी पक्ष के वकील जगत नारायण शुक्ला थे। जिन पर कटाक्ष करते
हुए अशफाक ने एक शेर कहा कि- 'चलो-चलो यारो रिंग थियेटर दिखाएं
तुमको, जो चन्द टुकड़ों पर सीमोजर के, नया तमाशा दिखा रहे हैं।²
निर्णय के विरुद्ध पूरे देश में प्रतिक्रिया हुई। ठा० मनजीत सिंह
(एम०एल०सी०) ने इस मामले को कौंसिल के आगामी अधिवेशन में उठाने
का प्रयत्न किया। वे फांसी की सजा को कम से कम काले पानी में
बदलवाना चाहते थे। इस हेतु उन्होंने गर्वनर को प्रार्थना पत्र भी दिया
और अन्य सदस्यों से सम्पर्क भी किया। लाभ सिर्फ यह हुआ कि सजा
की तिथि 16 सितम्बर से अक्टूबर कर दी गयी। पं० गोविन्द बल्लभ पंत ने
भी इसकी आलोचना की। मदन मोहन मालवीय तथा असेम्बली के अन्य
सदस्यों ने वायसराय से मुलाकात की और मृत्युदण्ड को बदलने की
प्रार्थना की। लेकिन कोई परिणाम न निकला। अशफाक को फैजाबाद
जेल भेज दिया गया। इस निर्णय के विरुद्ध चीफ कोर्ट में अपील की
गयी, लेकिन यहां भी निराशा ही हाथ लगी।³

  1. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-115
  2. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-114
  3. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-116-117
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