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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 153, कुल 297 में से

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रोटी, आवास, कपड़े के लिए प्रयास करना चाहिए।¹
कुछ अन्य दस्तावेज भी अशफाक के बक्से से प्राप्त हुए। उनमें से
एक पत्र भी था, जो अशफाक ने अपने माता-पिता को लिखा था।
अशफाक पत्र द्वारा सूचित करते हैं कि वे अभी भारत में ही हैं। अभी न
तो उपयुक्त समय आया है और न ही अवसर ही प्राप्त हुआ है। योजना
बनायी जा रही है। स्पष्ट है कि अशफाक भारत छोड़ना चाहते हैं।² एक
अन्य पत्र जो मौलाना मजिद को है। अशफाक इस पत्र में अपनी फरारी
का जिक्र करते हैं और भारत छोड़ने की मदद मांगते हैं। अशफाक ने दो
रास्ते भी सुझाये हैं। एक रास्ता पासपोर्ट और दूसरा आर्थिक सहायता हेतु
है। वे यह भी लिखते हैं कि यदि पर्याप्त धन वे पा जायें तो बचकर भाग
भी सकते हैं। एक सुझाव वे यह भी देते हैं कि - हो सके तो जहाज में
क्लर्क की नौकरी की व्यवस्था कर दें और मैं जहाज से बम्बई से जर्मनी
चला जाऊं।³ एक अन्य पत्र मौलाना अब्दुल कादिर को लिखा गया है, जो
अवकाश प्राप्त डिप्टी कलेक्टर हैं। अशफाक उल्ला से वे संबंधित है।
अब्दुल कादिर की बन्दूक अशफाक के पास मिली। इस पत्र में भी अपने
जीवन को खतरे में बताते हैं और आर्थिक सहायता की गुहार करते हैं।
वे इस पत्र में हैदराबाद प्रवेश करना चाहते हैं।
पत्रों की श्रृंखला में एक पत्र बहन को लिखा गया है। इस पत्र में
अपने संबोधनों का जिक्र करते हैं और बेदार का नाम लेते हैं। भगवती
सहाय बेदार शाहजहांपुर के षड्यंत्रकारियों में से एक थे।

  1. सी0आई0डी0, बायल्यूम-2, काकोरी षड्यंत्र केस-उ0प्र0रा0अभि0, पृष्ठ-41
  2. सी0आई0डी0, बायल्यूम-2, काकोरी षड्यंत्र केस-उ0प्र0रा0अभि0, पृष्ठ-44
  3. सी0आई0डी0, बायल्यूम-2, काकोरी षड्यंत्र केस-उ0प्र0रा0अभि0, पृष्ठ-45
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