अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउस मेनीफेस्टो में राष्ट्रीय आन्दोलन तथा आर्थिक कार्यक्रम के
सम्बन्ध में लिखा था और यह भी कि यह प्रचार सरकार धार्मिक आधार
पर करा रही है। यह असुरक्षित और गैर व्यवहारिक है। इसके पूर्व भी
लेखक सरकारों द्वारा धार्मिक पूर्वाग्रह के आधार पर असहयोग आन्दोलन
एवं खिलाफत आन्दोलन में किए गये क्रूर व्यवहारों पर टिप्पणी करता था,
जिसका सार यह है - 'हमारे हिन्दू भाइयों ने खिलाफत आन्दोलन में
शामिल होकर खिलाफत में शामिल मुसलमानों के धैर्य एवं दृढ़ निश्चय
को देखा और महसूस किया। उन्हें विश्वास हुआ कि एक निश्चित सीमा
तक हिन्दुओं के कट्टरपंथ की तरह ही वे भी अपनी भावनाओं को जागृत
करने में समर्थ हैं। उन्हें समाज के प्रतिक्रियावादी तत्वों जैसे हिन्दू शुद्धि
संगठन, महासभा, जो मुसलमानों को तब लीग तान्जिम जैसे कार्यों को
करने की तरफ उन्मुख किये। वर्तमान समस्या तो समाप्त हो गयी लेकिन
अन्ततः एक बुरी प्रथा का प्रारम्भ हो गया।
इन समस्याओं के मूल में केवल यही प्रतीत होता है कि आन्दोलन
अचानक ठहरने की स्थिति में धर्म ने ही मुख्य भूमिका अदा करनी शुरू
कर दी है। प्राप्त दस्तावेजों में भारतीय आन्दोलन एवं समस्याओं पर
विस्तृत जानकारी दी गयी है। यह भी कहा गया है कि - हमें अपने
देशवासियों को हर प्रकार से आर्थिक कार्यक्रमों को लक्ष्य करते हुए नये
आन्दोलन के लिए प्रभावित करना होगा। तरुण भारत के लिए न तो वेदों
के स्वर्ण युग में जाने की आवश्यकता है और न ही खिलाफत की
सल्तनत को बचाने की आवश्यकता है। भारत के लोगों को राजनीतिक
एवं आर्थिक रूप से स्वतंत्रता दिये जाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय
कार्यक्रमों को भारतीय जनता के लिए उनकी दैनिक आवश्यकताओं जैसे -
भूमि,
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