अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 129, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंगाड़ी के दोनों ओर पगदण्डी को छोड़कर घास के मैदानों में दो-दो
युवकों को नियुक्त कर दिया गया, उनके पास माऊजर पिस्तौले थीं। इन
पिस्तौलों को बट पहनाकर राइफल की तरह प्रयोग में लाया जा सकता
था, जिससे यह एक हजार गज तक मारकर सकती थी। इन दो युवकों
को कठोर आदेश दिया गया था कि किसी भी व्यक्ति पर गोली न चलायी
जाये। सिर्फ हवा में कुछ देर तक गोलियाँ चलाई जाती रहें। संयोग ही
ऐसा था कि अमजद अली नामक एक युवक व्यर्थ में मारा गया। उस
व्यक्ति का नया विवाह हुआ था और उसकी पत्नी महिलाओं वाले डिब्बे
में बैठी थी। क्रांतिकारियों की बार-बार चेतावनी के बावजूद वह डिब्बे से
बाहर निकल आया, शायद वह अपनी पत्नी को आश्वस्त करने जा रहा
था कि गोली का शिकार हो गया और मारा गया।¹ राम प्रसाद बिस्मिल
ने घटना का वर्णन करते हुए लिखा है - ‘'एक सज्जन गार्ड के डिब्बे से
उतरे। उनके पास भी माऊजर पिस्तौल थी। विचारा कि ऐसा शुभ अवसर
जाने कब हाथ आए। माऊजर पिस्तौल काहे को चलाने को मिलेगा। इसी
उमंग में सीधी गोली दागने लगे। मैंने जो देखा तो डांटा क्योंकि गोली
चलाने की उनकी ड्यूटी ही नहीं थी। फिर भी यदि कोई मुसाफिर
कौतूहलवश बाहर को सिर निकाले, तो उसको गोली जरूर लग जायेगी।
हुआ भी ऐसा ही जो व्यक्ति रेल से उतरकर अपनी स्त्री के पास जा रहा
था, मेरा ख्याल है कि इन्हीं महाशय की गोली उसके लग गई, क्योंकि
जिस समय यह महाशय सन्दूक नीचे डालकर गार्ड के डिब्बे से उतरे थे,
केवल दो-तीन फायर हुए थे। उसी समय स्त्री ने कोलाहल किया होगा
और उसका पति उसके पास जा रहा था, जो उस महाशय की उमंग का
शिकार हो गया।
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-65
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