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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 297 में से

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शेष सात सदस्य तीसरे क्लास डिब्बे में सवार हुए थे। राम प्रसाद बिस्मिल
दल का नेतृत्व कर रहे थे। ऐसे कार्यों में वे सदैव नेतृत्व ही किया करते
थे। तीसरे डिब्बे में सवार सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं - बिस्मिल, केशव
चक्रवती, मुरारी लाल, मुकुन्दीलाल, चन्द्रशेखर आजाद, बनवारी लाल और
मन्मथ नाथ गुप्त। दल के सदस्य गाड़ी में फैले हुए थे। अशफाक उल्ला
खां, राजेन्द्र लाहिड़ी, शचीन्द्र नाथ बख्शी का काम था कि जंजीर
खींचकर गाड़ी को खड़ी कर देंगे। क्रांतिकारियों के पास चार नए माऊजर
पिस्तौल थी और अन्य छोट-मोटे हथियार थे। प्रत्येक पिस्तौल के लिए
पचास से अधिक गोलियाँ थीं। योजना के अनुसार अक्षरशः पालन
हुआ। निर्धारित स्थान पर जंजीर खींच दी गयी।¹ जंजीर खींचते ही गाड़ी
रुक गयी। उस समय संध्या का समय था, अँधेरा छाने लगा था। गाड़ी
के रुकते ही मुसाफिर जंगले से मुँह निकालकर झाँकने लगे। वह यह
जानना चाहते थे कि मामला क्या है। गार्ड भी उतरकर उसी ओर जाने
लगा कि मामला क्या है? अभी दिन की रोशनी थोड़ी बाकी थी। गाड़ी
खड़ी होते ही दल के सदस्य अपने-अपने डिब्बों से उतर गये और कुछ
क्षणों में कार्य प्रारम्भ कर दिया गया। गार्ड साहब को क्रांतिकारियों ने
पिस्तौल दिखाकर जमीन पर लेटने के लिए आज्ञा दे दी। गार्ड साहब
औंधे मुंह जमीन पर लेट गये। दल के सभी सदस्यों ने अपने-अपने
हथियार निकाल लिए। माऊजर पिस्तौलें भी निकाल ली गयी थीं। इस
पिस्तौल की मार एक हजार गज तक होती थी और एक साथ दस
गोलियां भरी जाती थीं। दल के सदस्यों ने एक-दो हवाई फायर करते हुए
यात्रियों को चेतावनी दी कि वे सभी तुरन्त अपने-अपने डिब्बों के अन्दर
रहें। यात्रियों को कुछ नहीं कहा जायेगा, सिर्फ सरकारी खजाना लूटा
जायेगा। यात्री किसी प्रकार की चिन्ता न करें, वे केवल अपने-अपने
स्थानों पर शांतिपूर्वक बैठे रहें।


  1. भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्मथनाथ गुप्त, पृष्ठ-210

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