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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 113, कुल 297 में से

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अशफाक उल्ला उनमें प्रमुख थे, पर यह समझना गलत होगा जैसा
कि श्री शचीन्द्र नाथ जिन्हें उनके साथ हवालात में लम्बी अवधि तक रहने
का मौका मिला था, का कहना है कि अशफाक उल्ला स्वयं ही कोशिश
करके क्रांतिकारी दल में आये थे। उनका जन्म एक प्रसिद्ध पठान परिवार
में हुआ था उनके भाई भोपाल राज्य में किसी ऊंचे सरकारी पद पर थे।
असहयोग आन्दोलन के समय जो देश व्यापी लहर आयी थी, उसमें
अशफाक की पढ़ाई खत्म हो गयी और उनकी आत्मा कुछ करने के लिए
व्याकुल रहने लगी। उन्हीं दिनों राम प्रसाद फरारी से लौटकर आये थे
और अशफाक उल्ला ने किसी न किसी तरह उनसे परिचय प्राप्त किया
था।¹ चाहे जो हो अशफाक पूर्ण रूप से समर्पित क्रांतिकारी सदस्य बन
गये थे। अशफाक का क्रांतिकारी दल में सम्मिलित होना एक मुस्लिम
परिवार का होने के कारण एक नया अध्याय जोड़ता है।
अशफाक उल्ला खाँ ने निश्चित ही यह बता दिया कि वे एक ऐसा
समाज चाहते हैं जहाँ धनी-गरीब एक साथ रह सकें। शोषण रहित समाज
की उन्होंने कल्पना की थी। समाजवादी विचारधारा से पोषित अशफाक के
चिन्तन में स्वतंत्र भारत की एक तस्वीर थी। अवश्य ही अशफाक को
समझना भारत की संस्कृति और इतिहास की झलक पाना है। यही नहीं
हिन्दू-मुस्लिम या इसी प्रकार की अन्य प्रदूषित भावनाओं से दूर मानवी
हित की बात अशफाक ने की है। वे एकता के समर्थक थे। अपने विचारों
में उन्होंने एक स्थान पर लिखा भी है - ‘‘मैं हिन्दुस्तान की ऐसी
आजादी का ख्वाहिशमन्द हूँ, जिसमें गरीब खुश और आराम से रहते और
सब बराबर के होते।

  1. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -44
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