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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 114, कुल 297 में से

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क्रांतिधर्मी अशफाक ने शहीद भगत सिंह से पहले कहा था कि अगर
हिन्दुस्तान आजाद हुआ और बजाए हमारे गोरे आकाओं के हमारे वतनी
भाई सल्तनत व हुकूमत की बागडोर अपने हाथ में लेते और तफरी को
तमीज, अमीर व गरीब, जमींदार व काश्तकार में रहें तो ऐ खुदा, मुझे
ऐसी आजादी उस वक्त तक न देना जब तक मेरी मखलूक में मसावात
(बराबरी) कायम न हो जाय।’’$^1$
अशफाक क्रांतिकारी जीवन में अपने मित्रों को भी आत्म बलिदान
की प्रेरणा देते थे। समर्पित जीवन के धनी अशफाक के लिए एक मात्र
लक्ष्य था मातृभूमि की स्वतंत्रता, और इसी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एक
महत्वपूर्ण घटना 'काकोरी काण्ड' नाम से घटी जो क्रांतिकारी इतिहास में
महत्वपूर्ण षड्यंत्रों में गिनी जाती है।

  1. जांबाज पत्रिका (लेख), राजेश कुमार मित्तल, पृष्ठ -59
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