अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 112, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंसाथ ही यह भी ज्ञात होता है कि लेखक ने रूस के आदर्श को
अच्छी तरह नहीं समझा था। इस युग का कोई भी व्यक्ति इस आदर्श को
पूरी तरह नहीं समझ पाया था।''¹ चाहे जो हो यह तो स्पष्ट ही है कि
समाजवादी विचारधारा क्रांतिकारियों में प्रवाहित हो रही थी और अशफाक
इससे खूब प्रभावित थे, मन ही मन भेद भाव रहित समाज चाहते थे।
राम प्रसाद बिस्मिल तो जन्मजात क्रांतिकारी थे। कुछ दिनों के ठहराव के
बाद वे एक नये क्रांतिकारी संगठन में शामिल कर लिए गये। संगठन में
शामिल होने के लिए बिस्मिल 1923 में कानपुर पहुँचे थे और उनका
अनुभव काम आया।
राम प्रसाद बिस्मिल को हिन्दुस्तान गण तांत्रिक संगठन में पाकर
योगेश चन्द्र चटर्जी खुश हुए थे। शीघ ही बिस्मिल महत्वपूर्ण सदस्यों की
श्रेणी में आ गये। बिस्मिल को दल के लिए हथियार इकठ्ठा करने का
काम सौंपा गया। अब क्या था, जब राम प्रसाद स्वयं क्रांतिकारी दल के
मुख्य सदस्यों में आ गये तो अशफाक कैसे वंचित रह सकते हैं। अशफाक
भी संगठन के सदस्य बन गये। अशफाक के हृदय में देश भक्ति का जोश
तो था ही, मातृभूमि की भावना से भरे अशफाक कुछ कर दिखाना चाहते
थे। राम प्रसाद बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा में अशफाक के विषय में
वृहद चर्चा की है, जिसका उल्लेख किया जा चुका है।
शचीन्द्र नाथ ने भी लिखा है -‘‘अशफाक उल्ला खाँ स्वयं अपने
प्रयत्नों से ही क्रांतिकारी दल के सदस्य बने थे।''² उनके इस कथन का
समर्थन बिस्मिल की आत्मकथा से नहीं होता। मन्मथनाथ गुप्त कहते हैं
- ‘‘राम प्रसाद बिस्मिल ने जिन युवकों को शाहजहाँपुर में क्रांतिकारी दल
की ओर प्रवृत्त किया था,
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -42
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -44
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