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आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning

महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished32 पृष्ठ

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पृष्ठ 21

आदित्यहृदयस्तोत्रम् २१
'पूर्वगिरि—उदयाचल तथा पश्चिमगिरि—अस्ताचलके रूपमें
आपको नमस्कार है। ज्योतिर्गणों (ग्रहों और तारों)-के स्वामी
तथा दिनके अधिपति आपको प्रणाम है। आप जयस्वरूप तथा
विजय और कल्याणके दाता हैं। आपके रथमें हरे रंगके घोड़े जुते
रहते हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। सहस्रों किरणोंसे सुशोभित
भगवान् सूर्य! आपको बारंबार प्रणाम है। आप अदितिके पुत्र होनेके
कारण आदित्यनामसे प्रसिद्ध हैं, आपको नमस्कार है। उग्र
(अभक्तोंके लिये भयंकर), वीर (शक्ति-सम्पन्न) और सारंग
(शीघ्रगामी) सूर्यदेवको नमस्कार है। कमलोंको विकसित करनेवाले