आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)

आदित्यहृदय स्तोत्रम् (वाल्मीकि रामायण युद्धकाण्ड - महर्षि अगस्त्य-श्रीराम संवाद सविस्तार सटीक)
Aditya Hridaya Stotram with Hindi Meaning
महर्षि वाल्मीकि (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा
DevanagariHindipublished32 पृष्ठ
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आदित्यहृदयस्तोत्रम् २२
प्रचण्ड तेजधारी मार्तण्डको प्रणाम है। (परात्पर-रूपमें) आप
ब्रह्मा, शिव और विष्णुके भी स्वामी हैं। सूर आपकी संज्ञा है, यह
सूर्यमण्डल आपका ही तेज है, आप प्रकाशसे परिपूर्ण हैं, सबको
स्वाहा कर देनेवाला अग्नि आपका ही स्वरूप है, आप रौद्ररूप धारण
करनेवाले हैं; आपको नमस्कार है। आप अज्ञान और अन्धकारके
नाशक, जडता एवं शीतके निवारक तथा शत्रुका नाश करनेवाले
हैं, आपका स्वरूप अप्रमेय है। आप कृतघ्नोंका नाश करनेवाले,
सम्पूर्ण ज्योतियोंके स्वामी और देवस्वरूप हैं; आपको नमस्कार है।
आपकी प्रभा तपाये हुए सुवर्णके समान है, आप हरि (अज्ञानका हरण