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सर्वकोश
अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)

Abhidharmakosha and Bhashya of Vasubandhu with Commentary

आचार्य वसुबन्धु (टीकाकार: यशोमित्र, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished1,258 पृष्ठ

पृष्ठ 218, कुल 1258 में से

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पृष्ठ 218

" -> "तत् स्यात्"
"तत्राधिकं तद् वेदितव्यम्—यत्र द्वाविंशतिस्तत्र त्रयोविंशतिः, यत्र"
Wait, after त्रयोविंशतिः is there a comma? Yes: "त्रयोविंशतिः,".

Line 4:
त्रयोविंशतिस्तत्र चतुर्विंशतिरित्युवमादि ॥ ३० ॥
Wait, look at "चतुर्विंशतिरित्युवमादि" vs "चतुर्विंशतिरित्युक्तम्" vs "चतुर्विंशतिरित्यादि" vs "चतुर्विंशतिरित्युवमादि":
Wait! Let's read the characters:
च (ca)
तु (tu)
र्विं (rviṃ)
श (śa)
ति (ti)
रि (ri)
त्ये (tye)
व (va)
म (ma)
ा (ā)
दि (di)
॥ ३० ॥
Yes! "चतुर्विंशतिरित्युक्तम्"? No, it's त्ये (tye) + व (va) + म (ma) + ा (ā) + दि (di) = त्येवमादि!
"रित्युवमादि"? No, र् + इ + त् + य + े + व + म + ा + द + ि = "रित्‍येवमादि" (rityevamādi