अभिधर्मकोश एवं भाष्य (आचार्य वसुबन्धु - स्फुटार्था व्याख्या सहित सम्पूर्ण बौद्ध दर्शन महाकोश)
Abhidharmakosha and Bhashya of Vasubandhu with Commentary
आचार्य वसुबन्धु (टीकाकार: यशोमित्र, सम्पादक: स्वामी द्वारिकादास शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें? No, it's लत्वं. Wait, let me look at line 25 again: धर्मिविशेषविपर्ययात्पक्षा-orधर्मिविशेषविपर्ययापक्षा-? Look at या: after याthere is noत्, wait, or is that त्? Look at विपर्यया: there is या, and then प. There is NO त्! Wait, could it be धर्मिविशेषविपर्यया पक्षा-? Wait, look at: धर्मिविशेषविपर्ययापक्षा-Wait, could it beधर्मिविशेषविपर्ययात् पक्षा-? Where would the त्be? There is none. Wait, let's transcribe what is visible: Line 25:जायेरन्, तद्वत् । अनेन स्वविषयदेशप्राप्तित्वपक्षस्य धर्मिविशेषविपर्ययापक्षा-Line 26:लत्वं दर्शयति । सम्भवद्दिव्यत्वे हि चक्षुःश्रोत्रे धर्मी । असम्भवद्दिव्यत्वभावो`
Wait, let's re-examine:
Line 26:
लत्वं दर्शयति । सम्भवद्दिव्यत्वे हि चक्षुःश्रोत्रे धर्मी । असम्भवद्दिव्यत्वभावो
Line 27:
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