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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

by पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन

Source: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (origin)

DevanagariHindipublished118 pages

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घुमड़ रहा था। मन में उठ रहे सवालों के बवंडर से अप्रभावित महाराज बच्चे को गोद में
लेकर महल चले आए और उस बच्चे को अपनी महारानी की गोद में डालते हुए कहा,
“महारानी, इस बच्चे की माँ की तलाश की जाएगी। जब तक इसकी माँ नहीं मिल जाती
तब तक आप ही इसके लालन-पालन का कर्तव्य निभाहें।“ इसके बाद उन्होंने महारानी को
वह पूरा वृत्तान्त सुना दिया जो कि बच्चा मिलने के सम्बन्ध में मन्दिर का पुजारी उन्हें सुना
गया था।
महारानी को बालक थमाकर महाराज राजभवन पहुँचे और प्रहरी को भेजकर
अविलम्ब तेनाली राम को बुलावा भेजा।
तेनाली राम अचानक महाराज द्वारा बुलाए जाने से थोड़ा उद्वेलित हुआ और अविलम्ब
उनसे मिलने के लिए राजभवन पहुँच गया।
राजभवन पहुँचकर तेनाली राम ने देखा, महाराज राजभवन में बेचैनी से टहल रहे हैं।
तेनाली राम ने महाराज के सामने पहुँचकर औपचारिक अभिवादन किया लेकिन
महाराज ने बिना औपचारिकता के तेनाली राम का हाथ थाम लिया और एक मित्र की
तरह टहलते हुए राजभवन के पार्श्व में बने बगीचे में चले आए। तेनाली राम के आने के
बाद महाराज थोड़े आश्वस्त अवश्य हुए कि अब उस बच्चे को उसकी माँ तक पहुँचाने की
व्यवस्था हो जाएगी। उन्होंने बाग में टहलते हुए पुजारी द्वारा उस शिशु को लाए जाने और
शिशु को महारानी को सौंपे जाने तक की कहानी तेनाली राम को सुना दी।
तेनाली राम महाराज के मन के उद्वेलन को तो समझ ही रहा था, एक राजा होने के नाते
उस बालक के प्रति उनके दायित्व को भी समझ रहा था।
अन्ततः महाराज ने कहा, “तेनाली राम! मैं चाहता हूँ कि इस बच्चे की माँ की खोज की
जाए और ऐसी व्यवस्था की जाए कि वह महिला अपने बच्चे का लालन-पालन करे। मुझे
लगता है कि किसी महिला ने अपनी गरीबी के कारण इस बच्चे को भगवान के मन्दिर में
छोड़ा। भगवान के मन्दिर में आस्थावान, धार्मिक प्रवृत्तियों के लोग जाते हैं। बच्चे को मन्दिर
में छोड़ते समय उस महिला के मन में यही विचार रहा होगा कि कोई धर्मात्मा इस बच्चे को
अपना लेगा और इसका लालन-पालन करेगा। वह अपने बच्चे को निश्चित रूप से
संस्कारवान बनाने की कामना रखती होगी इसलिए ही उसे मन्दिर के द्वार पर छोड़कर
चली गई।” महाराज यह सब कहते हुए भावुक हो उठे और आगे कहा, “तेनाली राम! मेरा
मन कहता है कि इस बच्चे को इसकी माँ अवश्य मिलेगी।”
तेनाली राम महाराज की मनःस्थिति समझ रहा था। उसने महाराज से कहा, “यदि
आपका मन कहता है तो महारानी को उस बालक को पालने दीजिए और जब उसकी माँ
आ जाए तब उसे वह बालक सौंप दीजिए।”