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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

by पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन

Source: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (origin)

DevanagariHindipublished118 pages

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“तुम भी क्या बातें करते हो तेनाली राम! तब क्या बहुत विलम्ब न हो जाएगा? फिर
महारानी की गोद में पलने के बाद यह बालक किसी अन्य महिला को माँ का सम्मान दे
पाएगा? नहीं, ऐसा करना उचित नहीं होगा।” महाराज ने कहा।
तेनाली राम को महाराज की बातें ठीक लगीं और उसने महाराज की इच्छा जानने के
लिए पूछा, “फिर उचित क्या होगा महाराज?”
“उचित यह होगा कि हम इस बच्चे की माँ को तलाश करें।” महाराज ने कहा।...थोड़ी देर
चुप रहने के बाद महाराज ने फिर कहा, “और मैं चाहता हूँ कि उस बच्चे की माँ की खोज
की जिम्मेदारी तुम स्वीकार करो।”
यह बात हालाँकि तेनाली राम पहले समझ चुका था लेकिन महाराज के मुँह से सुन लेने
के बाद उसने कहा, “जैसी महाराज की आज्ञा।” थोड़ी देर तक तेनाली राम चुपचाप
महाराज के साथ टहलता रहा और फिर बोला, “महाराज, यदि मैं इस बच्चे की माँ की
खोज करूँगा तो यह भी चाहूँगा कि इससे सम्बन्धित व्यवस्था भी मैं ही करूँ।”
“हाँ! तुम्हें पूरी छूट है। जो चाहो करो।” महाराज ने कहा।
“तो महाराज, मेरी पहली विनती है कि उस बालक को राजभवन में एक पालने पर
रखवा दें और उसकी देखभाल वहाँ हो सके इसके लिए एक दासी वहाँ नियुक्त करवा दें। मैं
जानता हूँ कि महारानी जी बच्चे की अच्छी देखभाल कर रही होंगी लेकिन बच्चे की माँ की
खोज के लिए बच्चे को महल से राजभवन में लाया जाना आवश्यक है।” तेनाली राम ने
कहा।
महाराज ने तेनाली राम को आश्वस्त किया, “ऐसी व्यवस्था करा दी जाएगी।“
पुनः तेनाली राम ने महाराज से कहा, “महाराज! पूरे विजयनगर में यह मुनादी करा दी
जाए कि कल रात नगर के एक मन्दिर में एक बालक मिला है। लालन-पालन के लिए उसे
महाराज कृष्णदेव राय अपने साथ ले गए हैं। बच्चे को उन्होंने अपना आधा राज्य देने का
मन बना लिया है। इसके सम्बन्ध में कोई भी वैधानिक घोषणा करने से पूर्व महाराज इस
बच्चे की माँ से मिलना चाहते हैं ताकि वे उसकी मदद कर सकें। महाराज को विश्वास है कि
किसी मजबूरी में ही किसी ने अपने जिगर के टुकड़े को स्वयं से अलग कर भगवान के द्वार
पर छोड़ दिया होगा।”
महाराज ने इसकी भी स्वीकृति दे दी।
दोपहर का समय था। महाराज कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था। सभा की
कार्रवाई चल रही थी। महाराज से एक सभासद विजयनगर के पूर्वी भाग में सिंचाई की