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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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महावीरी व्याख्या चौ. ३८: जो शत बार पाठ कर कोई
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
जो शत बार पाठ कर कोई।
छूटहिं बंदि महा सुख होई॥ ३८ ॥
शब्दार्थ—बंदि ▸ लौकिक तथा पारलौकिक बन्धन।
अर्थ—यदि कोई इसका १०० बार पाठ श्रद्धा एवं भक्तिसे करेगा, उसके
लौकिक एवं पारलौकिक बन्धन छूट जाएँगे एवं उसे महासुखकी प्राप्ति
होगी।
व्याख्या—यहाँ शत शब्द १०८का बोधक है तथा बार शब्द दिन एवं
संख्याका वाचक है। कोई शब्द सर्वसाधारणके लिए अधिकार-समर्पक है,
अर्थात् कोई भी मनुष्य (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्री, इतरधर्मी कोई भी)
यदि हनुमान्-चालीसाका १०८ बार प्रतिदिनके क्रमसे १०८ दिन तक पाठ
करे तो निश्चित उसका अनिष्ट बन्धन छूट जाएगा। इस हनुमान्-चालीसाको
गोस्वामी तुलसीदासजी महाराजने समस्त प्राणिमात्रको तुलसीदल-प्रसाद-
रूपमें वितरित किया है। यह फलश्रुति है।
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