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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 पृष्ठ

7. साहिब जी को मदमस्त हाथी द्वारा मरवाने का प्रयास

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साहिब बन्दगी

(7) साहिब जी को मदमस्त हाथी द्वारा मरवाने का प्रयास

शेख तकी क्रोध से भरा हुआ साहिब को मारने की योजना पर योजना बना रहा था। शेख तकी ने योजना बनाई कि कबीर को हाथी के पैरों तले कुचलवा देता हूँ। शेख तकी ने महावत से एक विशाल हाथी मंगवाया और महावत को समझा दिया कि हाथी को शराब पिलाकर मदमस्त कर कबीर को कुचलना है। उसने महावत को इस काम के लिए ईनाम का लालच भी दिया। महावत इस काम के लिए तैयार हो गया। उधर साहिब जी को शेख तकी ने सैनिकों द्वारा बँधवा दिया ताकि वे कहीं भाग भी न सकें। फिर महावत को आदेश दिया कि हाथी को कबीर के ऊपर चढ़ाओ और कुचल डालो। जैसे ही महावत हाथी को लेकर कबीर साहिब के पास पहुँचा, हाथी उल्टे पाँव भागने लगा। महावत ने बहुत प्रयास किया, पर हाथी मानता ही नहीं था। वो डरकर भाग खड़ा हुआ। रहस्य यह था कि हाथी को कबीर साहिब के दोनों ओर शेर दिखाई पड़े, जिससे वो डरकर भाग गया। महावत इस रहस्य को समझ नहीं पा रहा था कि हाथी पीछे क्यों भाग रहा है। शेख तकी का साहिब को मारने का यह प्रयास भी विफल हो गया और उसे हार से लज्जित होना पड़ा।

साहिब को मरवाने हेतू, मदमस्त हाथी ले आये।
महावत आगे को करे, वो पीछे हट जाए॥
डर से पीछे हट रहा, महावत रहा घबरायो।
भागा जंगल की तरफ, किसे मिला न आये॥

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