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सर्वकोश
युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

Yuktikalpataru of Maharaja Bhoja with Commentary

महाराज भोज (सम्पादक: पण्डित ईश्वरचन्द्र शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

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पृष्ठ 86

तोहीना चतुःशालं ( ३ ) सुखावहम् ॥ ३१३ ॥`

  • Note: पूर्व्वतोहीना or पूर्व्वतो हीना? It's पूर्व्वतोहीना.

  • ( ३ ) has spaces inside.

  • सुखावहम् ॥ ३१३ ॥

  • : पश्चिमास्यं यजेद्वेश्म सिंहेतूदङ्मुखं शुभम् ।

    • सिंहेतूदङ्मुखं: सिंहेतूदङ्मुखं (ङ with subscript ख, ङ्ख or ङ्मुखं? ङ्मुखं: ङ् + म? No, wait! Look at the letter: सिंहेतूदङ्मुखं -> wait, is it दङ्मुखं? द + ङ् + ख? No, दङ्मुखं -> द with ङ्मुखं: ङ् + म? Look at सिंहेतूदङ्मुखं: सिं हे तू द ङ्मु खं! Wait, look at दङ्मुखं: द has a hook below? It's दङ्मुखं? No, तूदङ्मुखं? In सिंहेतूदङ्मुखं: सिंहे तू `दङ्मुख