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सर्वकोश
युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

Yuktikalpataru of Maharaja Bhoja with Commentary

महाराज भोज (सम्पादक: पण्डित ईश्वरचन्द्र शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished278 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 278 में से

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पृष्ठ 50

' or 'नौति'! Let's look at it:
न with au-matra: नौ! Then ति!
Wait, does it have 'ौ' or 'ी'?
Look at 'नी' in "सन्धिर्नैव": न + ै!
Here: look at "नौति":
Wait, it has two strokes on top of the vertical line! That's 'ौ'! So it is printed as "नौतिधर्म्मरतश्च".

Wait, let's check line 11:
"एतैः सन्धिं न कुर्वीत विशेषात् पूर्व्वपीडितैः ॥ ८४ ॥"
Let's check line 12:
"सन्धिं हि तादृशैः कुर्व्वन् प्राणैरपि हि हीयते ॥ ८५ ॥"
Wait, is there a separator?
A line with a star in the middle: — or •—•
Then:
"आसनम् ।"
Then:
"अन्यद्वारा विपन्नन्तु विगृह्यासनमुच्यते ।"
"अरिं विगृह्य वा स्थानम् विग्रहासनमुच्यते ॥ ८६ ॥"
Wait, look at "स्थानम् विग्रहासनमुच्यते":
"स्थानम्" with anusvara or halanta ma?
It is "स्थानम्" with halanta ma!
And "विपन्नन्तु": विपन्नन्तु!

Let's check the footnotes:
Dividing line.
"( २४ ) प्रतिश्रियं इति