युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)

युक्तिकल्पतरु (महाराज भोज - नौका-निर्माण, जलयान-विज्ञान, शस्त्र, दुर्ग एवं राजधर्म सटीक)
Yuktikalpataru of Maharaja Bhoja with Commentary
महाराज भोज (सम्पादक: पण्डित ईश्वरचन्द्र शास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished278 पृष्ठ
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स्थिरावज्रमिदं? There is a space: स्थिरा वज्रमिदं`.
- Line 15:
यदा तित्तिरिपक्षाभमङ्गं भूमिः सितेतरा ॥ ९२ ॥- Wait,
तित्तिरिपक्षाभमङ्गं:ति,त्ति,रि,प,क्षा,भ,म,ङ्गं.
- Line 16:
एतत् तित्तिरिबज्रं स्यात् तत्क्षते बहुधेनवः ।- Wait! Look at
तित्तिरिबज्रंorतित्तिरिवज्रं: - Look at the
ब/व: it has a diagonal slash? - Look at
बज्रंin line 16: Yes, there is a diagonal slash inside the belly! It isबज्रं! - Wait, look at line 14:
वज्रमिदं- no slash (व). - Line 16: has a slash? Actually, wait, let's look at
बहुधेनवःin the same line:बhas a slash! - In
तित्तिरिबज्रं, the loop has a clear slash! So it is indeed `तित्तिरिब