बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 83, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( ८२ )
गुरु का चिन्ह : विज्ञान में असाधारण योग्यता ।
शनि का चिन्ह : जीवन में हर क्षेत्र में निराशा ।
सूर्य का चिन्ह : धार्मिक भावना का विकास एवं ज्योतिष शास्त्र में
निपुणता ।
शुक्र का चिन्ह : धन के लालच में निन्दनीय प्रेम ।
चन्द्र का चिन्ह : षडयन्त्र तथा धोखा देने की प्रवृत्ति ।
मंगल का चिन्ह : ठगविद्या में सफलता ।
५. शुक्र पर्वत :
एक रेखा : तीव्र कामवासना ।
कई रेखाएं : अत्यधिक भोगी ।
आपस में कटती हुई रेखाएं : प्रेम में असफलता तथा सम्मान हानि ।
बिन्दु : गुप्तांगों की बीमारी ।
क्रॉस : असफल प्रेम तथा जीवन में निराशावादी भावना का विकास ।
नक्षत्र : प्रेमिका के कारण धन हानि ।
वर्ग : जेल यात्रा ।
वृत्त : दुर्घटना में शारीरिक क्षति ।
त्रिकोण : जीवन में कई स्त्रियों से भोग करने वाला ।
जाली : अस्वस्थ शरीर ।
शुक्र का चिन्ह : विशेष भोगी ।
गुरु का चिन्ह : चापलूसी करने वाला ।
शनि का चिन्ह : ईर्ष्या एवं अन्याय पूर्ण प्रेम भावना ।
सूर्य का चिन्ह : आदर्श प्रेम
बुध का चिन्ह : धन के लिए प्रेम ।
चन्द्र का चिन्ह : वासना पूर्ण विचार ।
मंगल का चिन्ह : जीवन में कई बार कई स्त्रियों से बलात्कार ।
६. मंगल पर्वत :
एक रेखा : साहस ।
कई रेखाएं : हिंसात्मक प्रवृत्ति ।