बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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कई रेखाएं : कलात्मक रुचि तथा उच्च पद प्राप्ति ।
आपस में कटती हुई रेखाएं : नौकरी में बाधाएं ।
बिन्दु : अपमान एवं पराजय ।
क्रॉस : प्रसिद्धि में न्यूनता ।
नक्षत्र : धन, उच्च पद प्राप्ति ।
वर्ग : समाज में विशेष सम्मान ।
वृत्त : जीवन में कई बार विदेश यात्रा ।
त्रिकोण : कला के क्षेत्र में उच्च सम्मान ।
जाली : मान हानि ।
सूर्य का चिह्न : कला के माध्यम से विश्व प्रसिद्ध सम्मान तथा श्रेष्ठ
धन लाभ ।
शनि का चिह्न : तंत्र विद्याओं में रुचि ।
गुरु का चिह्न : सफल राजनीतिज्ञ ।
बुध का चिह्न : वाक्पटु ।
शुक्र का चिह्न : कविता तथा कला के प्रति विशेष रुझान ।
चन्द्र का चिह्न : साहित्यिक कार्यों में सफलता ।
मंगल का चिह्न : प्रसिद्ध सैनिक अथवा सेनाध्यक्ष ।
४. बुध पर्वत :
एक रेखा : धनवान तथा समृद्धि।
कई रेखाएं : व्यापार में असाधारण योग्यता ।
आपस में कटती हुई रेखाएं : सफल चिकित्सक ।
बिन्दु : व्यापार में असाधारण हानि ।
क्रॉस : दिवालिया ।
नक्षत्र : विदेशों में व्यापार करने वाला ।
वर्ग : भविष्य को पहचानने वाला ।
वृत्त : एक्सीडेंट तथा आकस्मिक मृत्यु ।
त्रिकोण : राजनीतिक सफलता ।
जाली : मान हानि ।
धब्बा : व्यापार में असफलता ।
बुध का चिह्न : सफल व्यापारी ।