बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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त्रिकोण : राजनीतिक एवं धार्मिक कार्यों में सफलता ।
जाली : अंधविश्वास, अशुभ घटनाएं तथा हानि ।
वृत्त : प्रत्येक कार्य में सफलताएं ।
गुरु का चिह्न : पर्वत में पाये जाने वाले गुणों का विकास ।
शनि का चिह्न : तंत्र विद्याओं में सफलता ।
सूर्य का चिह्न : ललित कलाओं में रुचि ।
बुध का चिह्न : प्रशासन दक्षता ।
शुक्र का चिह्न : उच्च घराने की महिलाओं से प्रेम ।
चन्द्र का चिह्न : युद्ध में निपुणता ।
२. शनि पर्वत :
एक रेखा : भाग्योदय में वृद्धि ।
कई रेखाएं : जीवन में निरन्तर बाधाएं ।
आपस में कटती हुई रेखाएं : दुर्भाग्य तथा चिन्ताएं ।
बिन्दु : असम्भावित घटनाओं में वृद्धि ।
क्रॉस : कमजोरी तथा नपुंसकता ।
नक्षत्र : हत्या करने की भावना का विकास ।
वर्ग : अनिष्टों से बचाव ।
वृत्त : मांगलिक कार्यों में रुचि ।
त्रिकोण : रहस्यमय कार्यों में वृद्धि ।
जाली : भाग्यहीनता ।
शनि का चिह्न : धर्म, दर्शन, तथा तंत्र आदि विद्याओं में रुचि ।
गुरु का चिह्न : दर्शन के क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध सफलता ।
सूर्य का चिह्न : कलात्मक सौन्दर्य का विकास ।
बुध का चिह्न : ज्योतिष शास्त्र में रुचि ।
शुक्र का चिह्न : विपरीत योनि के प्रति प्रेम का आवेग एवं असफलता ।
मंगल का चिह्न : न्यायाधीश एवं न्यायप्रियता ।
३. सूर्य पर्वत :
एक रेखा : धन, सम्मान एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि ।