बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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पारावत योग :
परिभाषा: हथेली में सात ग्रहों में से चार ग्रहों के
पर्वत विकसित हों बलवान और पुष्ट हों तथा उनसे संबंधित
रेखाएं सरल, सीधी तथा निर्दोष हों तो वह पारावत योग
होता है।
फल : जिस व्यक्ति की हथेली में पारावत योग होता
है वह आर्थिक दृष्टि से पूर्ण सम्पन्न होता है तथा उसके
जीवन में सुख उपभोग की कोई कमी नहीं रहती ।
पारावत योग
नृप योग :
परिभाषा · यदि हथेली में सात ग्रहों में से तीन ग्रहों के
पर्वत बलवान, पुष्ट तथा लालिमा युक्त हों तथा साथ ही उनसे
संबंधित रेखाए भी स्पष्ट हों तो नृप योग होता है।
फल : जिसके हाथ में नृप योग होता है वह आर्थिक
दृष्टि से सम्पन्न होता है तथा वाहन, भूमि, मकान, परिवार,
आदि सभी दृष्टियों में पूर्ण सुख का उपभोग करता है।
नृप योग
गौरी योग :
परिभाषा यदि हथेली में सात ग्रहों के पर्वतों में से
दो ग्रह पर्वत बलवान और पुष्ट हो तथा उनसे संबंधित रेखाएं
भी स्पष्ट हो तो हाथ में गौरी योग होता है।
फल : जिसके हाथ में गौरी योग होता है वह भूमि-
पति होता है। कृषि कार्यों में उसकी विशेष रुचि होती है तथा
परिवार के सभी सदस्यों को वह अत्यधिक स्नेह से रखता है।
ऐसा व्यक्ति धार्मिक भावनाओं को मानने वाला तथा देवताओं
की पूजा करने वाला होता है। इसके पुत्र भी योग्य, गुणवान
तथा उच्च कोटि के होते हैं।
गौरी योग