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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 269, कुल 350 में से

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पृष्ठ 269

( २६८ )
राज योग :
परिभाषा : यदि हथेली में सात ग्रहों में से कोई एक
ग्रह का पर्वत बलवान पुष्ट तथा लालिमा युक्त हो तथा उससे
संबंधित रेखा भी सीधी सरल और स्पष्ट हो तो राज योग होता
है।
फल : जिसके हाथ में राज योग होता है वह अपने
परिश्रम से ऊंचा उठकर अपने जीवन को सुखमय बनाता है।
तथा यदि अन्य रेखाएं अच्छी हों तो गजेटेड अधिकारी बनता है
ऐसा व्यक्ति परिश्रम पूर्वक धन संचय करता है तथा उसका
पूरा आनन्द उठाता है।
राज योग
राज्य योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में सूर्य रेखा बलवान हो और
गुरु पर्वत श्रेष्ठ हो तो राज्य योग होता है।
फल : राज्य योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति सभी
सुख-सुविधाओं में पूर्ण जीवन व्यतीत करने का प्रयत्न करते हैं।
परन्तु जीवन के अन्तिम समय में और विशेषकर ४२वें साल के
बाद से उसका भाग्योदय होता है तथा उसे भूमि, मकान तथा
वाहन सुख मिलता है। ऐसा व्यक्ति चतुर, विपत्ति में भी धैर्य
रखने वाला तथा योग्य होता है।
राज्य योग
टिप्पणी : निम्नलिखित योग भी राज्य योग कहलाते हैं ।
१. हाथ में गुरु पर्वत श्रेष्ठ तथा सभी उंगलिया लम्बी और पतली हों ।
२. यदि कनिष्ठिका उंगली जरूरत से ज्यादा लम्बी हो ।
३. यदि शुक्र पर्वत के नीचे स्वस्तिक का चिह्न हो ।
४. यदि गुरु पर्वत बडा हो तथा उस पर से रेखा सूर्य पर्वत की ओर जा
रही हो ।
५. यदि मणिबन्ध से भाग्य रेखा का प्रारंभ हो ।
६. यदि गुरु पर्वत हथेली के बाहर न निकला हुआ हो तथा अपने आप में
श्रेष्ठ हो ।