बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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१९. यदि हाथ में बुध पर्वत पर जाली का चिन्ह हो तथा उसके प्रथम पर्व
पर बिन्दु हो।
२० यदि शनि पर्वत पर एक दूसरे को काटती हुई अस्त-व्यस्त रेखाएं हों।
२१. यदि चन्द्र पर्वत पर शनि का चिन्ह हो ।
२२. यदि सूर्य पर्वत तथा बुध पर्वत का हाथ में अभाव हो ।
२३. यदि बुध पर्वत पर वृत्त का चिन्ह हो ।
२४. यदि ऊर्ध्व मंगल पर क्रॉस धब्बा या जाली हो ।
२५. यदि जीवन रेखा बीच में कटी हुई हो तथा उसके साथ ही साथ वह
मोटी और लाल रंग की हो।
२६. यदि मस्तिष्क रेखा जंजीरदार हो ।
२७. यदि जीवन रेखा के प्रारंभ में कई शाखाएं निकलती हों ।
२८. जीवन रेखा से एक रेखा फुन्दनेदार होकर चन्द्र पर्वत को जा रही हो ।
२९. यदि हृदय रेखा दो तीन जगहों से टूटी हुई हो ।
३०. यदि वृहस्पति और शनि के बीच में चक्र का चिह्न हो ।
३१. यदि मस्तिष्क रेखा पीली तथा कमजोर हो ।
३२. यदि हृदय रेखा तथा जीवन रेखा के बीच क्रॉस का चिह्न हों ।
३३. यदि मस्तिष्क रेखा कमजोर तंग-सी होकर हथेली के पार जा रही हो ।
३४. यदि जीवन रेखा चन्द्र पर्वत की ओर झुक रही हो तथा तर्जनी पर
तारे का चिह्न हो ।
३५. यदि दोनों हाथों में मस्तिष्क रेखा जरूरत से ज्यादा कमजोर तथा टूटी
हुई हो ।
३६. यदि मस्तिष्क रेखा पर सफेद धब्बे हों ।
फल : हाथ मे चाहे कितने ही अच्छे योग हों परन्तु यदि उसके हाथ मे राज-
भंग योग भी हो तो वह जातक दुखी, परेशान, चिन्तित, तथा दरिद्र जीवन व्यतीत
करने वाला होता है ।