बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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२. यदि हाथ में दो से अधिक त्रिभुज चिह्न हों ।
३. बुध पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह हो और उसके नीचे बिन्दु हो ।
४. हाथ की उंगलियां तथा अंगूठा छोटा हो और उसके नाखून पीले छोटे
तथा लगभग गोल हों ।
राजभंग योग :
परिभाषा : हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित
योग राजभंग योग कहलाते हैं ।
१. यदि उंगलियों की गांठें फूली हुई हों तथा लगभग
बाहर बढ़ी हुई हों ।
२. यदि सभी उंगलियां चपटी हों तथा तर्जनी पर
सफेद बिन्दु हो ।
३. यदि नाखूनों के अग्र भाग चपटे तथा अन्दर की
ओर धंसे हुए हों ।
४. यदि अंगूठे के पहले पर्व पर ३-४ लम्बी रेखाएं
हों । राजभंग योग
५. यदि उंगलियों के अग्रभाग आगे की ओर झुके हुए हो ।
६. यदि हथेली बहुत मोटी और सख्त हो तथा उंगलिया छोटी-छोटी हों ।
७. यदि सभी उंगलियां कठोर लम्बी तथा दबी हुई हों और उनके जोड़
भद्दे हों ।
८. यदि चन्द्र पर्वत पर दो त्रिकोण हों तथा उन दोनों के बीच में बिन्दु का
चिन्ह हो ।
६. यदि शुक्र पर्वत हथेली के बाहर की ओर निकला हुआ हो ।
१०. यदि स्वास्थ्य रेखा मे कई पतली-पतली रेखाएं निकल कर नीचे की
ओर जा रही हों ।
११. यदि मस्तिष्क रेखा कमजोर हो तथा उस पर काले बिन्दु हों ।
१२. यदि गुरु तथा सूर्य की रेखाएं लहरदार हों ।
१३. यदि हाथ के मध्य में जाली हो तथा इसी प्रकार की जाली सूर्य पर्वत पर
भी हो ।
१४. यदि सभी उंगलियों के प्रथम पर्व पर नक्षत्र के चिन्ह हों ।
१५. यदि गुरु रेखा सीढ़ीदार हो ।
१६. यदि सूर्य रेखा के नीचे द्वीप का चिन्ह हो ।
१७. यदि शुक्र रेखा तथा चन्द्र रेखा धब्बेदार हो ।
१८. यदि सूर्य रेखा का प्रारंभ फुन्दनेदार हो ।