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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 239

( २३८ )
भाग्योदय योग :
परिभाषा : यदि मणिबन्ध से भाग्य रेखा प्रारम्भ
होकर मध्यमा के दूसरे पौर तक वह रेखा जाती हो तो वह
उपर्युक्त योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसका भाग्यो-
दय जीवन के प्रारम्भ में ही हो जाता है और भाग्य के
बल से ही वह जीवन में सभी दृष्टियों से सफलता प्राप्त करता
है ।
भाग्योदय योग
पूर्ण आयु योग :
परिभाषा : यदि हथेली में जीवन रेखा पूर्ण रूप
से विकसित होकर अपने उद्गम स्थान से मणिबन्ध तक
जाती हो और उस पर किसी प्रकार का क्रॉस बिन्दु, धब्बा या
रेखा न हो तो वह पूर्ण आयु प्राप्त करता है ।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह
स्वस्थ रूप से पूर्ण आयु भोगता है ।
टिप्पणी : कुछ विद्वानों ने इसके अलावा निम्नलिखित
योगों को भी पूर्ण आयु योग कहा है ।
पूर्ण आयु योग १. यदि तीन मणिबन्ध अपने आप में पूर्ण हों तथा
पहला मणिबन्ध जंजीरदार हो ।
२. जीवन रेखा मणिबन्ध से स्पर्श करती हो ।
३. भाग्य रेखा तथा जीवन रेखा का परस्पर सम्बन्ध बन गया हो
४. सूर्य रेखा अपने आप में निर्दोष हो तथा मस्तिष्क रेखा के आगे बढ़ी हुई
हो ।
५. हाथों के पर्वत पूर्ण रूप से विकसित हों तथा अंगूठा लम्बा पतला दृढ़
पीछे की तरफ झुका हुआ और सुन्दर हो ।
६. स्वास्थ्य रेखा पूरी लम्बाई लिए हुए हो तथा उस पर किसी प्रकार का
बिन्दु या क्रॉस न हो ।