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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 240, कुल 350 में से

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पृष्ठ 240

( २३६ )
शताधिक आयुर्योग :
परिभाषा : जिसके दोनों हाथों में जीवन रेखा अपने
उद्गम स्थान से प्रारम्भ होकर शुक्र क्षेत्र को पूरा विस्तार
देती हुई मणिबन्ध तक पहुंचती हो तो यह योग होता है।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति सौ
वर्ष से भी अधिक आयु भोगता तथा उसका जीवन आनन्दमय
होता है।
शताधिक आयुर्योग
अमितमायु योग :
परिभाषा : यदि दोनों हाथों में बुध, चन्द्र, गुरु तथा
सूर्य पर्वत विकसित हों तथा जीवन रेखा निर्दोष लम्बी तथा
स्पष्ट हो तो उसके हाथ में अमितमायु योग होता है।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
अपने कार्यों से विश्व विख्यात होता है। एक दृष्टि से देखा
जाय तो उसके जीवन में किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं
रहता। उसका पारिवारिक जीवन सुखमय होता है आर्थिक
दृष्टि से वह अत्यधिक सम्पन्न होता है तथा सौ से भी अधिक
वर्षों तक स्वस्थ सानन्द व सुखमय आयु व्यतीत करता है।
अमितमायु योग
टिप्पणी : सामुद्रिक शास्त्र में इस योग को अत्यन्त श्रेष्ठ माना है तथा यह
योग होने से व्यक्ति लखपती बन जाता है। जीवन में भौतिक दृष्टि से उसे पूर्ण सुख
मिलता है।
महाभाग्य योग :
परिभाषा : यदि व्यक्ति का जन्म दिन में हो तथा
सूर्य रेखा पूर्ण लम्बाई लिए हुए हो, साथ ही सूर्य पर्वत अपने
स्थान पर विकसित एवं पुष्ट हो, इसके अलावा चन्द्र और गुरु
पर्वत सुदृढ़ हो तो उसके हाथ में महाभाग्य योग होता है।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति
उत्तम विचारों का धनी तथा समाज का नेतृत्व करने वाला
होता है। उस व्यक्ति के सम्पर्क में जो भी व्यक्ति आता है
वह अपने आपको सौभाग्यशाली समझता है ।। आर्थिक दृष्टि
से इसके जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती।
महाभाग्य योग