बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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४. यदि सूर्य पर्वत के नीचे सफ़ेद धब्बे हों ।
५. यदि ढाई या तीन मणिबन्ध रेखाएं हों ।
भाग्य योग :
परिभाषा : यदि हथेली में भाग्य रेखा पुष्ट सूर्य पर्वत
पर पहुंचती हो तो यह योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह प्रबल
भाग्यशाली व्यक्ति माना जाता है ।
टिप्पणी : सामुद्रिक शास्त्र के विद्वानों ने इसके अलावा
निम्नलिखित योगों को भी भाग्य योग माना है :
१. यदि भाग्य रेखा गुरु पर्वत से प्रारम्भ होती हो ।
२. यदि भाग्य रेखा शनि पर्वत से चलकर बृहस्पति
पर्वत से नीचे समाप्त होती हो पर वहां सफेद बिन्दु
भाग्य योग
हों ।
३. भाग्य रेखा पुष्ट हो तथा सूर्य पर्वत पर तारे का चिह्न हो ।
४. दोनों हाथों में स्पष्ट और लम्बी भाग्य रेखाएं हों
५. मणिबन्ध पर क्रॉस का चिन्ह हो तथा वहां से सीधी भाग्य रेखा बनी
हो ।
६. वृहस्पति पर्वत पर तारे का चिह्न हो ।
७. यदि भाग्य रेखा चन्द्र पर्वत से प्रारम्भ होती हो ।
८. यदि कोई रेखा अनामिका की जड़ से प्रारम्भ होकर पूर्ण रूप से ऊपर
तक पहुंची हो ।
९. मणिबन्ध की प्रथम रेखा जंजीरदार पर टूटी हुई न हो तथा वहां से भाग्य
रेखा प्रारम्भ हुई हो ।
१०. सूर्य रेखा के नीचे त्रिकोण का चिन्ह हो ।
११. हृदय तथा मस्तिष्क रेखाएं गुरु पर्वत के नीचे मिलती हों ।
१२. शुक्र पर्वत से बुध पर्वत तक कोई रेखा जाती हो ।
१३. गुरु पर्वत पर एक सीधी खड़ी रेखा हो ।
१४. बुध पर्वत पर कोई सीधी तथा स्पष्ट रेखा हो ।
१५. दोनों हाथों में गुरु पर्वत विकसित हों तथा सूर्य रेखाएं गहरी हों ।