बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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११. धर्माचार्य :
यदि किसी मनुष्य की हथेली में तर्जनी अनामिका से
लम्बी हो तथा गुरु पर्वत पूर्ण विकास लिये हुए हो और उस
पर क्रॉस का चिह्न हो तो वह व्यक्ति निश्चय ही एक सफल
पुरोहित या धार्मिक व्यक्ति होता है।
यदि ऊपर लिखे चिह्न हों तथा सूर्य पर्वत और सूर्य
रेखा बहुत अधिक विकसित हो तो वह व्यक्ति प्रसिद्ध उपदेशक
या धर्माचार्य होता है।
यदि ऊपर लिखे चिन्ह हों तथा जीवन रेखा कटी हुई
हो तो ऐसा व्यक्ति निश्चय ही सन्यासी होता है और
सन्यासी होने के बाद ही उसको यश तथा सम्मान मिलता है। धर्माचार्य
१२. कलाकार :
जब किसी व्यक्ति की हथेलियां पूरी लम्बाई लिये
हुए तथा गांठ रहित हों एवं उसकी उंगलियां ढलवीं हों और
उंगली के ऊपर के सिरे नौकीले हों तो वह व्यक्ति सफल
कलाकार होता है।
यदि ऊपर लिखे गुण हों साथ ही चन्द्र पर्वत पूर्ण
विकसित हो तो वह व्यक्ति श्रेष्ठ चित्रकार माना जाता है।
यदि बुध पर्वत विकसित हो तथा बुध रेखा भी पूर्ण लम्बी
तथा निर्दोष रूप से बढ़ी हुई हो तो वह व्यक्ति सफल संगीतज्ञ
होता है। यदि ऊपर लिखे गुण हों तथा शुक्र पर्वत पूरी तरह
से विकास पर हो तथा उसका क्षेत्र अत्यन्त फैला हुआ हो तो
कलाकार वह व्यक्ति सफल नृत्यकार होता है तथा प्रसिद्धि प्राप्त करता है।
इसके साथ-साथ भाग्य रेखा तथा सूर्य रेखा जितनी ही ज्यादा स्पष्ट, गहरी
तथा लालिमा लिये हुए होगी वह व्यक्ति उतना ही ज्यादा सफल लोकप्रिय तथा
विख्यात होगा।