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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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पृष्ठ 198

( १५७ )
यदि चन्द्र पर्वत अत्यन्त दबा हुआ हो तथा भाग्य रेखा कमजोर हो तो वह
केवल नाव चलाने वाला नाविक होता है।
६. डाक्टर :
जिस की हथेली में बुध पर्वत पूर्ण विकसित हो तथा
कनिष्ठिका पूरी लम्बाई लिये हुए हो जिसका सिरा अनामिका
के ऊपरी पौर के मध्य तक जाता हो तथा बुध क्षेत्र पर तीन
चार खड़ी रेखाएं हों तो ऐसा व्यक्ति एक सफल डाक्टर
होता है।
यदि ऊपर लिखे गुण हथेली में हों पर इसके साथ ही
साथ मंगल पर्वत अत्यन्त विकसित हो तथा मंगल रेखा भी
पुष्ट एवं प्रबल हो तो वह व्यक्ति एक सफल सर्जन होता है।
यदि मंगल पर्वत दबा हुआ हो इसके अलावा अन्य
सभी गुण हथेली में हों तथा बृहस्पति पूर्ण विकसित हो और
उस पर वर्ग का चिह्न हो तो वह व्यक्ति ख्याति प्राप्त वैद्य
होता है।
[चित्र: डाक्टर]
१०. इंजीनियर :
यहां इन्जीनियर से मेरा तात्पर्य वैज्ञानिक एवं
मैकेनिक से भी है। यदि किसी मनुष्य की सभी उंगलियां
पूरी लम्बाई लिये हुए हों तथा शनि पर्वत विकसित हो तथा
उस पर भाग्य रेखा निर्दोष रूप से आकर ठहरी हुई हो एवं
पर्वत पर तीन-चार खड़ी रेखाएं हों तो वह व्यक्ति एक
बुध सफल वैज्ञानिक होता है।
यदि ऊपर लिखे गुण हों पर बृहस्पति पर्वत कमजोर
हो तो वह एक सफल इन्जीनियर होता है। यदि इन्जीनियर
के चिह्न हों तथा चन्द्र पर्वत श्रेष्ठ हो तो वह वाटर वर्क्स में
इन्जीनियर होता है।
यदि ऊपर लिखे चिह्न हथेली में हों तथा मस्तिष्क
रेखा और शनि रेखा पूर्ण विकास लिये हुए हो तो वह एक [चित्र: इंजीनियर]
सफल वायुयान चालक होता है पर उसमें चन्द्र पर्वत तथा चन्द्र रेखा अत्यन्त श्रेष्ठ
होनी आवश्यक है।